[{"i":48,"v":["निश्चय ही हमने तुम्हारे लिए एक खुली विजय प्रकट की","ताकि अल्लाह तुम्हारे अगले और पिछले गुनाहों को क्षमा कर दे और तुमपर अपनी अनुकम्पा पूर्ण कर दे और तुम्हें सीधे मार्ग पर चलाए","और अल्लाह तुम्हें प्रभावकारी सहायता प्रदान करे","वहीं है जिसने ईमानवालों के दिलों में सकीना (प्रशान्ति) उतारी, ताकि अपने ईमान के साथ वे और ईमान की अभिवृद्धि करें - आकाशों और धरती की सभी सेनाएँ अल्लाह ही की है, और अल्लाह सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है।","ताकि वह मोमिन पुरुषों औप मोमिन स्त्रियों को ऐसे बाग़ों में दाख़िल करे जिनके नीचे नहरें बहती होंगी कि वे उनमें सदैव रहें और उनसे उनकी बुराईयाँ दूर कर दे - यह अल्लाह के यहाँ बड़ी सफलता है।","और कपटाचारी पुरुषों और कपटाचारी स्त्रियों और बहुदेववादी पुरुषों और बहुदेववादी स्त्रियों को, जो अल्लाह के बारे में बुरा गुमान रखते है, यातना दे। उन्हीं पर बुराई की गर्दिश है। उनपर अल्लाह का क्रोध हुआ और उसने उनपर लानत की, और उसने उनके लिए जहन्नम तैयार कर रखा है, और वह अत्यन्त बुरा ठिकाना है","आकाशों और धरती की सब सेनाएँ अल्लाह ही की है। अल्लाह प्रभुत्वशाली, अत्यन्त तत्वदर्शी है","निश्चय ही हमने तुम्हें गवाही देनेवाला और शुभ सूचना देनेवाला और सचेतकर्त्ता बनाकर भेजा","ताकि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ, उसे सहायता पहुँचाओ और उसका आदर करो, और प्रातःकाल और संध्या समय उसकी तसबीह करते रहो","(ऐ नबी) वे लोग जो तुमसे बैअत करते है वे तो वास्तव में अल्लाह ही से बैअत करते है। उनके हाथों के ऊपर अल्लाह का हाथ होता है। फिर जिस किसी ने वचन भंग किया तो वह वचन भंग करके उसका बवाल अपने ही सिर लेता है, किन्तु जिसने उस प्रतिज्ञा को पूरा किया जो उसने अल्लाह से की है तो उसे वह बड़ा बदला प्रदान करेगा","जो बद्‌दू पीछे रह गए थे, वे अब तुमसे कहेगे, \"हमारे माल और हमारे घरवालों ने हमें व्यस्त कर रखा था; तो आप हमारे लिए क्षमा की प्रार्थना कीजिए।\" वे अपनी ज़बानों से वे बातें कहते है जो उनके दिलों में नहीं। कहना कि, \"कौन है जो अल्लाह के मुक़ाबले में तुम्हारे किए किसी चीज़ का अधिकार रखता है, यदि वह तुम्हें कोई हानि पहुँचानी चाहे या वह तुम्हें कोई लाभ पहुँचाने का इरादा करे? बल्कि जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसकी ख़बर रखता है।","नहीं, बल्कि तुमने यह समझा कि रसूल और ईमानवाले अपने घरवालों की ओर लौटकर कभी न आएँगे और यह तुम्हारे दिलों को अच्छा लगा। तुमने तो बहुत बुरे गुमान किए और तुम्हीं लोग हुए तबाही में पड़नेवाले।","और अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान न लाया, तो हमने भी इनकार करनेवालों के लिए भड़कती आग तैयार कर रखी है","अल्लाह ही की है आकाशों और धरती की बादशाही। वह जिसे चाहे क्षमा करे और जिसे चाहे यातना दे। और अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","जब तुम ग़नीमतों को प्राप्त करने के लिए उनकी ओर चलोगे तो पीछे रहनेवाले कहेंगे, \"हमें भी अनुमति दी जाए कि हम तुम्हारे साथ चले।\" वे चाहते है कि अल्लाह का कथन को बदल दे। कह देना, \"तुम हमारे साथ कदापि नहीं चल सकते। अल्लाह ने पहले ही ऐसा कह दिया है।\" इसपर वे कहेंगे, \"नहीं, बल्कि तुम हमसे ईर्ष्या कर रहे हो।\" नहीं, बल्कि वे लोग समझते थोड़े ही है","पीछे रह जानेवाले बद्‌दूओं से कहना, \"शीघ्र ही तुम्हें ऐसे लोगों की ओर बुलाया जाएगा जो बड़े युद्धवीर है कि तुम उनसे लड़ो या वे आज्ञाकारी हो जाएँ। तो यदि तुम आज्ञाकारी हो जाएँ। तो यदि तुम आज्ञापालन करोगे तो अल्लाह तुम्हें अच्छा बदला प्रदान करेगा। किन्तु यदि तुम फिर गए, जैसे पहले फिर गए थे, तो वह तुम्हें दुखद यातना देगा।","न अन्धे के लिए कोई हरज है, न लँगडे के लिए कोई हरज है और न बीमार के लिए कोई हरज है। जो भी अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करेगा, उसे वह ऐसे बाग़ों में दाख़िल करके, जिनके नीचे नहरे बह रही होगी, किन्तु जो मुँह फेरेगा उसे वह दुखद यातना देगा","निश्चय ही अल्लाह मोमिनों से प्रसन्न हुआ, जब वे वृक्ष के नीचे तुमसे बैअत कर रहे थे। उसने जान लिया जो कुछ उनके दिलों में था। अतः उनपर उसने सकीना (प्रशान्ति) उतारी और बदले में उन्हें मिलनेवाली विजय निश्चित कर दी","और बहुत-सी ग़नीमतें भी, जिन्हें वे प्राप्त करेंगे। अल्लाह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है","अल्लाह ने तुमसे बहुत-सी गंनीमतों का वादा किया हैं, जिन्हें तुम प्राप्त करोगे। यह विजय तो उसने तुम्हें तात्कालिक रूप से निश्चित कर दी। और लोगों के हाथ तुमसे रोक दिए (कि वे तुमपर आक्रमण करने का साहस न कर सकें) और ताकि ईमानवालों के लिए एक निशानी हो। और वह सीधे मार्ग की ओर तुम्हारा मार्गदर्शन करे","इसके अतिरिक्त दूसरी और विजय का भी वादा है, जिसकी सामर्थ्य अभी तुम्हे प्राप्त नहीं, उन्हें अल्लाह ने घेर रखा है। अल्लाह को हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है","यदि (मक्का के) इनकार करनेवाले तुमसे लड़ते तो अवश्य ही पीठ फेर जाते। फिर यह भी कि वे न तो कोई संरक्षक पाएँगे और न कोई सहायक","यह अल्लाह की उस रीति के अनुकूल है जो पहले से चली आई है, और तुम अल्लाह की रीति में कदापि कोई परिवर्तन न पाओगे","वही है जिसने उसके हाथ तुमसे और तुम्हारे हाथ उनसे मक्के की घाटी में रोक दिए इसके पश्चात कि वह तुम्हें उनपर प्रभावी कर चुका था। अल्लाह उसे देख रहा था जो कुछ तुम कर रहे थे","ये वही लोग तो है जिन्होंने इनकार किया और तुम्हें मस्जिदे हराम (काबा) से रोक दिया और क़ुरबानी के बँधे हुए जानवरों को भी इससे रोके रखा कि वे अपने ठिकाने पर पहुँचे। यदि यह ख़याल न होता कि बहुत-से मोमिन पुरुष और मोमिन स्त्रियाँ (मक्का में) मौजूद है, जिन्हें तुम नहीं जानते, उन्हें कुचल दोगे, फिर उनके सिलसिले में अनजाने तुमपर इल्ज़ाम आएगा (तो युद्ध की अनुमति दे दी जाती, अनुमति इसलिए नहीं दी गई) ताकि अल्लाह जिसे चाहे अपनी दयालुता में दाख़िल कर ले। यदि वे ईमानवाले अलग हो गए होते तो उनमें से जिन लोगों ने इनकार किया उनको हम अवश्य दुखद यातना देते","याद करो जब इनकार करनेवाले लोगों ने अपने दिलों में हठ को जगह दी, अज्ञानपूर्ण हठ को; तो अल्लाह ने अपने रसूल पर और ईमानवालो पर सकीना (प्रशान्ति) उतारी और उन्हें परहेज़गारी (धर्मपरायणता) की बात का पाबन्द रखा। वे इसके ज़्यादा हक़दार और इसके योग्य भी थे। अल्लाह तो हर चीज़ जानता है","निश्चय ही अल्लाह ने अपने रसूल को हक़ के साथ सच्चा स्वप्न दिखाया, \"यदि अल्लाह ने चाहा तो तुम अवश्य मस्जिदे हराम (काबा) में प्रवेश करोगे बेखटके, अपने सिर के बाल मुड़ाते और कतरवाते हुए, तुम्हें कोई भय न होगा।\" हुआ यह कि उसने वह बात जान ली जो तुमने नहीं जानी। अतः इससे पहले उसने शीघ्र प्राप्त होनेवाली विजय तुम्हारे लिए निश्चिंत कर दी","वही है जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन और सत्यधर्म के साथ भेजा, ताकि उसे पूरे के पूरे धर्म पर प्रभुत्व प्रदान करे और गवाह की हैसियत से अल्लाह काफ़ी है","अल्लाह के रसूल मुहम्मद और जो लोग उनके साथ हैं, वे इनकार करनेवालों पर भारी हैं, आपस में दयालु है। तुम उन्हें रुकू में, सजदे में, अल्लाह का उदार अनुग्रह और उसकी प्रसन्नता चाहते हुए देखोगे। वे अपने चहरों से पहचाने जाते हैं जिनपर सजदों का प्रभाव है। यही उनकी विशेषता तौरात में और उनकी विशेषता इंजील में उस खेती की तरह उल्लिखित है जिसने अपना अंकुर निकाला; फिर उसे शक्ति पहुँचाई तो वह मोटा हुआ और वह अपने तने पर सीधा खड़ा हो गया। खेती करनेवालों को भा रहा है, ताकि उनसे इनकार करनेवालों का भी जी जलाए। उनमें से जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनसे अल्लाह ने क्षमा और बदले का वादा किया है"],"n":"अल-फ़थ"},{"i":49,"v":["ऐ ईमानवालो! अल्लाह और उसके रसूल से आगे न बढो और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह सुनता, जानता है","ऐ लोगो, जो ईमान लाए हो! तुम अपनी आवाज़ों को नबी की आवाज़ से ऊँची न करो। और जिस तरह तुम आपस में एक-दूसरे से ज़ोर से बोलते हो, उससे ऊँची आवाज़ में बात न करो। कहीं ऐसा न हो कि तुम्हारे कर्म अकारथ हो जाएँ और तुम्हें ख़बर भी न हो","वे लोग जो अल्लाह के रसूल के समक्ष अपनी आवाज़ों को दबी रखते है, वही लोग है जिनके दिलों को अल्लाह ने परहेज़गारी के लिए जाँचकर चुन लिया है। उनके लिए क्षमा और बड़ा बदला है","जो लोग (ऐ नबी) तुम्हें कमरों के बाहर से पुकारते है उनमें से अधिकतर बुद्धि से काम नहीं लेते","यदि वे धैर्य से काम लेते यहाँ तक कि तुम स्वयं निकलकर उनके पास आ जाते तो यह उनके लिए अच्छा होता। किन्तु अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","ऐ लोगों, जो ईमान लाए हो! यदि कोई अवज्ञाकारी तुम्हारे पास कोई ख़बर लेकर आए तो उसकी छानबीन कर लिया करो। कहीं ऐसा न हो कि तुम किसी गिरोह को अनजाने में तकलीफ़ और नुक़सान पहुँचा बैठो, फिर अपने किए पर पछताओ","जान लो कि तुम्हारे बीच अल्लाह का रसूल मौजूद है। बहुत-से मामलों में यदि वह तुम्हारी बात मान ले तो तुम कठिनाई में पड़ जाओ। किन्तु अल्लाह ने तुम्हारे लिए ईमान को प्रिय बना दिया और उसे तुम्हारे दिलों में सुन्दरता दे दी और इनकार, उल्लंघन और अवज्ञा को तुम्हारे लिए बहुत अप्रिय बना दिया।","ऐसे ही लोग अल्लाह के उदार अनुग्रह और अनुकम्पा से सूझबूझवाले है। और अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, तत्वदर्शी है","यदि मोमिनों में से दो गिरोह आपस में लड़ पड़े तो उनके बीच सुलह करा दो। फिर यदि उनमें से एक गिरोह दूसरे पर ज़्यादती करे, तो जो गिरोह ज़्यादती कर रहा हो उससे लड़ो, यहाँ तक कि वह अल्लाह के आदेश की ओर पलट आए। फिर यदि वह पलट आए तो उनके बीच न्याय के साथ सुलह करा दो, और इनसाफ़ करो। निश्चय ही अल्लाह इनसाफ़ करनेवालों को पसन्द करता है","मोमिन तो भाई-भाई ही है। अतः अपने दो भाईयो के बीच सुलह करा दो और अल्लाह का डर रखो, ताकि तुमपर दया की जाए","ऐ लोगो, जो ईमान लाए हो! न पुरुषों का कोई गिरोह दूसरे पुरुषों की हँसी उड़ाए, सम्भव है वे उनसे अच्छे हों और न स्त्रियाँ स्त्रियों की हँसी उड़ाए, सम्भव है वे उनसे अच्छी हों, और न अपनों पर ताने कसो और न आपस में एक-दूसरे को बुरी उपाधियों से पुकारो। ईमान के पश्चात अवज्ञाकारी का नाम जुडना बहुत ही बुरा है। और जो व्यक्ति बाज़ न आए, तो ऐसे ही व्यक्ति ज़ालिम है","ऐ ईमान लानेवालो! बहुत से गुमानों से बचो, क्योंकि कतिपय गुमान गुनाह होते है। और न टोह में पड़ो और न तुममें से कोई किसी की पीठ पीछे निन्दा करे - क्या तुममें से कोई इसको पसन्द करेगा कि वह मरे हुए भाई का मांस खाए? वह तो तुम्हें अप्रिय होगी ही। - और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह तौबा क़बूल करनेवाला, अत्यन्त दयावान है","ऐ लोगो! हमनें तुम्हें एक पुरुष और एक स्त्री से पैदा किया और तुम्हें बिरादरियों और क़बिलों का रूप दिया, ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो। वास्तव में अल्लाह के यहाँ तुममें सबसे अधिक प्रतिष्ठित वह है, जो तुममे सबसे अधिक डर रखता है। निश्चय ही अल्लाह सबकुछ जाननेवाला, ख़बर रखनेवाला है","बद्‌दुओं ने कहा कि, \"हम ईमान लाए।\" कह दो, \"तुम ईमान नहीं लाए। किन्तु यूँ कहो, 'हम तो आज्ञाकारी हुए' ईमान तो अभी तुम्हारे दिलों में दाख़िल ही नहीं हुआ। यदि तुम अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो तो वह तुम्हारे कर्मों में से तुम्हारे लिए कुछ कम न करेगा। निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है।","मोमिन तो बस वही लोग है जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए, फिर उन्होंने कोई सन्देह नहीं किया और अपने मालों और अपनी जानों से अल्लाह के मार्ग में जिहाद किया। वही लोग सच्चे है","कहो, \"क्या तुम अल्लाह को अपने धर्म की सूचना दे रहे हो। हालाँकि जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है, अल्लाह सब जानता है? अल्लाह को हर चीज़ का ज्ञान है।","वे तुमपर एहसान जताते है कि उन्होंने इस्लाम क़बूल कर लिया। कह दो, \"मुझ पर अपने इस्लाम का एहसान न रखो, बल्कि यदि तुम सच्चे हो तो अल्लाह ही तुमपर एहसान रखता है कि उसने तुम्हें ईमान की राह दिखाई।","निश्चय ही अल्लाह आकाशों और धरती के अदृष्ट को जानता है। और अल्लाह देख रहा है जो कुछ तुम करते हो।"],"n":"अल-हुजुरात"},{"i":50,"v":["क़ाफ़॰; गवाह है क़ुरआन मजीद","बल्कि उन्हें तो इस बात पर आश्चर्य हुआ कि उनके पास उन्हीं में से एक सावधान करनेवाला आ गया। फिर इनकार करनेवाले कहने लगे, \"यह तो आश्चर्य की बात है","क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी हो जाएँगे (तो फिर हम जीवि होकर पलटेंगे)? यह पलटना तो बहुत दूर की बात है","हम जानते है कि धरती उनमें जो कुछ कमी करती है और हमारे पास सुरक्षित रखनेवाली एक किताब भी है","बल्कि उन्होंने सत्य को झुठला दिया जब वह उनके पास आया। अतः वे एक उलझन भी बात में पड़े हुए है","अच्छा तो क्या उन्होंने अपने ऊपर आकाश को नहीं देखा, हमने उसे कैसा बनाया और उसे सजाया। और उसमें कोई दरार नहीं","और धरती को हमने फैलाया और उसमे अटल पहाड़ डाल दिए। और हमने उसमें हर प्रकार की सुन्दर चीज़े उगाई","आँखें खोलने और याद दिलाने के उद्देश्य से, हर बन्दे के लिए जो रुजू करनेवाला हो","और हमने आकाश से बरकतवाला पानी उतारा, फिर उससे बाग़ और फ़सल के अनाज।","और ऊँचे-ऊँचे खजूर के वृक्ष उगाए जिनके गुच्छे तह पर तह होते है","बन्दों की रोजी के लिए। और हमने उस (पानी) के द्वारा निर्जीव धरती को जीवन प्रदान किया। इसी प्रकार निकलना भी हैं","उनसे पहले नूह की क़ौम, 'अर्-रस' वाले, समूद","आद, फ़िरऔन , लूत के भाई","अल-ऐका' वाले और तुब्बा के लोग भी झुठला चुके है। प्रत्येक ने रसूलों को झुठलाया। अन्ततः मेरी धमकी सत्यापित होकर रही","क्या हम पहली बार पैदा करने से असमर्थ रहे? नहीं, बल्कि वे एक नई सृष्टि के विषय में सन्देह में पड़े है","हमने मनुष्य को पैदा किया है और हम जानते है जो बातें उसके जी में आती है। और हम उससे उसकी गरदन की रग से भी अधिक निकट है","जब दो प्राप्त करनेवाले (फ़रिशते) प्राप्त कर रहे होते है, दाएँ से और बाएँ से वे लगे बैठे होते है","कोई बात उसने कही नहीं कि उसके पास एक निरीक्षक तैयार रहता है","और मौत की बेहोशी ले आई अविश्व नीय चीज़! यही वह चीज़ है जिससे तू कतराता था","और नरसिंघा फूँक दिया गया। यही है वह दिन जिसकी धमकी दी गई थी","हर व्यक्ति इस दशा में आ गया कि उसके साथ एक लानेवाला है और एक गवाही देनेवाला","तू इस चीज़ की ओर से ग़फ़लत में था। अब हमने तुझसे तेरा परदा हटा दिया, तो आज तेरी निगाह बड़ी तेज़ है","उसके साथी ने कहा, \"यह है (तेरी सजा)! मेरे पास कुछ (सहायता के लिए) मौजूद नहीं।","डाल दो, डाल दो, जहन्नम में! हर अकृतज्ञ द्वेष रखने वाले","भलाई से रोकनेवाले, सीमा का अतिक्रमण करनेवाले, सन्देहग्रस्त को","जिसने अल्लाह के साथ किसी दूसरे को पूज्य-प्रभु ठहराया। तो डाल दो उसे कठोर यातना में।","उसका साथी बोला, \"ऐ हमारे रब! मैंने उसे सरकश नहीं बनाया, बल्कि वह स्वयं ही परले दरजे की गुमराही में था।","कहा, \"मेरे सामने मत झगड़ो। मैं तो तुम्हें पहले ही अपनी धमकी से सावधान कर चुका था।","मेरे यहाँ बात बदला नहीं करती और न मैं अपने बन्दों पर तनिक भी अत्याचार करता हूँ।","जिस दिन हम जहन्नम से कहेंगे, \"क्या तू भर गई?\" और वह कहेगी, \"क्या अभी और भी कुछ है","और जन्नत डर रखनेवालों के लिए निकट कर दी गई, कुछ भी दूर न रही","यह है वह चीज़ जिसका तुमसे वादा किया जाता था हर रुजू करनेवाले, बड़ी निगरानी रखनेवाले के लिए","जो रहमान से डरा परोक्ष में और आया रुजू रहनेवाला हृदय लेकर","प्रवेश करो उस (जन्नत) में सलामती के साथ\" वह शाश्वत दिवस है","उनके लिए उसमें वह सब कुछ है जो वे चाहे और हमारे पास उससे अधिक भी है","उनसे पहले हम कितनी ही नस्लों को विनष्ट कर चुके है। वे लोग शक्ति में उनसे कहीं बढ़-चढ़कर थे। (पनाह की तलाश में) उन्होंने नगरों को छान मारा, कोई है भागने को ठिकाना","निश्चय ही इसमें उस व्यक्ति के लिए शिक्षा-सामग्री है जिसके पास दिल हो या वह (दिल से) हाजिर रहकर कान लगाए","हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है छः दिनों में पैदा कर दिया और हमें कोई थकान न छू सकी","अतः जो कुछ वे कहते है उसपर धैर्य से काम लो और अपने रब की प्रशंसा की तसबीह करो; सूर्योदय से पूर्व और सूर्यास्त के पूर्व","और रात की घड़ियों में फिर उसकी तसबीह करो और सजदों के पश्चात भी","और कान लगाकर सुन लेगा जिस दिन पुकारनेवाला अत्यन्त निकट के स्थान से पुकारेगा","जिस दिन लोग भयंकर चीख़ को सत्यतः सुन रहे होंगे। वही दिन होगा निकलने का।","हम ही जीलन प्रदान करते और मृत्यु देते है और हमारी ही ओर अन्ततः आना है।","जिस दिन धरती उनपर से फट जाएगी और वे तेजी से निकल पड़ेंगे। यह इकट्ठा करना हमारे लिए अत्यन्त सरल है","हम जानते है जो कुछ वे कहते है, तुम उनपर कोई ज़बरदस्ती करनेवाले तो हो नहीं। अतः तुम क़ुरआन के द्वारा उसे नसीहत करो जो हमारी चेतावनी से 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नहीं","और आकाश मे ही तुम्हारी रोज़ी है और वह चीज़ भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है","अतः सौगन्ध है आकाश और धरती के रब की। निश्चय ही वह सत्य बात है ऐसे ही जैसे तुम बोलते हो","क्या इबराईम के प्रतिष्ठित अतिथियों का वृतान्त तुम तक पहँचा","जब वे उसके पास आए तो कहा, \"सलाम है तुमपर!\" उसने भी कहा, \"सलाम है आप लोगों पर भी!\" (और जी में कहा) \"ये तो अपरिचित लोग हैं।","फिर वह चुपके से अपने घरवालों के पास गया और एक मोटा-ताज़ा बछड़ा (का भूना हुआ मांस) ले आया","और उसे उनके सामने पेश किया। कहा, \"क्या आप खाते नहीं","फिर उसने दिल में उनसे डर महसूस किया। उन्होंने कहा, \"डरिए नहीं।\" और उन्होंने उसे एक ज्ञानवान लड़के की मंगल-सूचना दी","इसपर उसकी स्त्री (चकित होकर) आगे बढ़ी और उसने अपना मुँह पीट लिया और कहने लगी, \"एक बूढ़ी बाँझ (के यहाँ बच्चा पैदा होगा)","उन्होंने कहा, \"ऐसी ही तेरे रब ने कहा है। निश्चय ही वह बड़ा तत्वदर्शी, ज्ञानवान है।","उसने कहा, \"ऐ (अल्लाह के भेजे हुए) दूतों, तुम्हारे सामने क्या मुहिम है","उन्होंने कहा, \"हम एक अपराधी क़ौम की ओर भेजे गए है","ताकि उनके ऊपर मिट्टी के पत्थर (कंकड़) बरसाएँ","जो आपके रब के यहाँ सीमा का अतिक्रमण करनेवालों के लिए चिन्हित है।","फिर वहाँ जो ईमानवाले थे, उन्हें हमने निकाल लिया","किन्तु हमने वहाँ एक घर के अतिरिक्त मुसलमानों (आज्ञाकारियों) का और कोई घर न पाया","इसके पश्चात हमने वहाँ उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी, जो दुखद यातना से डरते है","और मूसा के वृतान्त में भी (निशानी है) जब हमने फ़िरऔन के पास के स्पष्ट प्रमाण के साथ भेजा","किन्तु उसने अपनी शक्ति के कारण मुँह फेर लिया और कहा, \"जादूगर है या दीवाना।","अन्ततः हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ लिया और उन्हें गहरे पानी में फेंक दिया, इस दशा में कि वह निन्दनीय था","और आद में भी (तुम्हारे लिए निशानी है) जबकि हमने उनपर अशुभ वायु चला दी","वह जिस चीज़ पर से गुज़री उसे उसने जीर्ण-शीर्ण करके रख दिया","और समुद्र में भी (तुम्हारे लिए निशानी है) जबकि उनसे कहा गया, \"एक समय तक मज़े कर लो","किन्तु उन्होंने अपने रब के आदेश की अवहेलना की; फिर कड़क ने उन्हें आ लिया और वे देखते रहे","फिर वे न खड़े ही हो सके और न अपना बचाव ही कर सके","और इससे पहले नूह की क़ौम को भी पकड़ा। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे","आकाश को हमने अपने हाथ के बल से बनाया और हम बड़ी समाई रखनेवाले है","और धरती को हमने बिछाया, तो हम क्या ही ख़ूब बिछानेवाले है","और हमने हर चीज़ के जोड़े बनाए, ताकि तुम ध्यान दो","अतः अल्लाह की ओर दौड़ो। मैं उसकी ओर से तुम्हारे लिए एक प्रत्यक्ष सावधान करनेवाला हूँ","और अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य-प्रभु न ठहराओ। मैं उसकी ओर से तुम्हारे लिए एक प्रत्यक्ष सावधान करनेवाला हूँ","इसी तरह उन लोगों के पास भी, जो उनसे पहले गुज़र चुके है, जो भी रसूल आया तो उन्होंने बस यही कहा, \"जादूगर है या दीवाना","क्या उन्होंने एक-दूसरे को इसकी वसीयत कर रखी है? नहीं, बल्कि वे है ही सरकश लोग","अतः उनसे मुँह फेर लो अब तुमपर कोई मलामत नहीं","और याद दिलाते रहो, क्योंकि याद दिलाना ईमानवालों को लाभ पहुँचाता है","मैंने तो जिन्नों और मनुष्यों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी बन्दगी करे","मैं उनसे कोई रोज़ी नहीं चाहता और न यह चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ","निश्चय ही अल्लाह ही है रोज़ी देनेवाला, शक्तिशाली, दृढ़","अतः जिन लोगों ने ज़ुल्म किया है उनके लिए एक नियत पैमाना है; जैसा उनके साथियों का नियत पैमाना था। अतः वे मुझसे जल्दी न मचाएँ","अतः इनकार करनेवालों के लिए बड़ी खराबी है, उनके उस दिन के कारण जिसकी उन्हें धमकी दी जा रही है"],"n":"ज़ारियात"},{"i":52,"v":["गवाह है तूर पर्वत","और लिखी हुई किताब","फैले हुए झिल्ली के पन्ने में","और बसा हुआ घर","और ऊँची छत","और उफनता समुद्र","कि तेरे रब की यातना अवश्य घटित होकर रहेगी","जिसे टालनेवाला कोई नहीं","जिस दिल आकाश बुरी तरह डगमगाएगा","और पहाड़ चलते-फिरते होंगे","तो तबाही है उस दिन, झुठलानेवालों के लिए","जो बात बनाने में लगे हुए खेल रहे है","जिस दिन वे धक्के दे-देकर जहन्नम की ओर ढकेले जाएँगे","(कहा जाएगा), \"यही है वह आग जिसे तुम झुठलाते थे","अब भला (बताओ) यह कोई जादू है या तुम्हे सुझाई नहीं देता","जाओ, झुलसो उसमें! अब धैर्य से काम लो या धैर्य से काम न लो; तुम्हारे लिए बराबर है। तुम वही बदला पा रहे हो, जो तुम करते रहे थे।","निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ों और नेमतों में होंगे","जो कुछ उनके रब ने उन्हें दिया होगा, उसका आनन्द ले रहे होंगे और इस बात से कि उनके रब ने उन्हें भड़कती हुई आग से बचा लिया","मज़े से खाओ और पियो उन कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे हो।","पंक्तिबद्ध तख़्तो पर तकिया लगाए हुए होंगे और हम बड़ी आँखोंवाली हूरों (परम रूपवती स्त्रियों) से उनका विवाह कर देंगे","जो लोग ईमान लाए और उनकी सन्तान ने भी ईमान के साथ उसका अनुसरण किया, उनकी सन्तान को भी हम उनसे मिला देंगे, और उनके कर्म में से कुछ भी कम करके उन्हें नहीं देंगे। हर व्यक्ति अपनी कमाई के बदले में बन्धक है","और हम उन्हें मेवे और मांस, जिसकी वे इच्छा करेंगे दिए चले जाएँगे","वे वहाँ आपस में प्याले हाथोंहाथ ले रहे होंगे, जिसमें न कोई बेहूदगी होगी और न गुनाह पर उभारनेवाली कोई बात","और उनकी सेवा में सुरक्षित मोतियों के सदृश किशोर दौड़ते फिरते होंगे, जो ख़ास उन्हीं (की सेवा) के लिए होंगे","उनमें से कुछ व्यक्ति कुछ व्यक्तियों की ओर हाल पूछते हुए रुख़ करेंगे","कहेंगे, \"निश्चय ही हम पहले अपने घरवालों में डरते रहे है","अन्ततः अल्लाह ने हमपर एहसास किया और हमें गर्म विषैली वायु की यातना से बचा लिया","इससे पहले हम उसे पुकारते रहे है। निश्चय ही वह सदव्यवहार करनेवाला, अत्यन्त दयावान है।","अतः तुम याद दिलाते रहो। अपने रब की अनुकम्पा से न तुम काहिन (ढोंगी भविष्यवक्ता) हो और न दीवाना","या वे कहते है, \"वह कवि है जिसके लिए हम काल-चक्र की प्रतीक्षा कर रहे है","कह दो, \"प्रतीक्षा करो! मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करता हूँ।","या उनकी बुद्धियाँ यही आदेश दे रही है, या वे ही है सरकश लोग","या वे कहते है, \"उसने उस (क़ुरआन) को स्वयं ही कह लिया है?\" नहीं, बल्कि वे ईमान नहीं लाते","अच्छा यदि वे सच्चे है तो उन्हें उस जैसी वाणी ले आनी चाहिए","या वे बिना किसी चीज़ के पैदा हो गए? या वे स्वयं ही अपने स्रष्टाँ है","या उन्होंने आकाशों और धरती को पैदा किया","या उनके पास तुम्हारे रब के खज़ाने है? या वही उनके परिरक्षक है","या उनके पास कोई सीढ़ी है जिसपर चढ़कर वे (कान लगाकर) सुन लेते है? फिर उनमें से जिसने सुन लिया हो तो वह ले आए स्पष्ट प्रमाण","या उस (अल्लाह) के लिए बेटियाँ है और तुम्हारे अपने लिए बेटे","या तुम उनसे कोई पारिश्रामिक माँगते हो कि वे तावान के बोझ से दबे जा रहे है","या उनके पास परोक्ष (स्पष्ट) है जिसके आधार पर वे लिए रहे हो","या वे कोई चाल चलना चाहते है? तो जिन लोगों ने इनकार किया वही चाल की लपेट में आनेवाले है","या अल्लाह के अतिरिक्त उनका कोई और पूज्य-प्रभु है? अल्लाह महान और उच्च है उससे जो वे साझी ठहराते है","यदि वे आकाश का कोई टुकटा गिरता हुआ देखें तो कहेंगे, \"यह तो परत पर परत बादल है","अतः छोडो उन्हें, यहाँ तक कि वे अपने उस दिन का सामना करें जिसमें उनपर वज्रपात होगा","जिस दिन उनकी चाल उनके कुछ भी काम न आएगी और न उन्हें कोई सहायता ही मिलेगी","और निश्चय ही जिन लोगों ने ज़ुल्म किया उनके लिए एक यातना है उससे हटकर भी, परन्तु उनमें से अधिकतर जानते नहीं","अपने रब का फ़ैसला आने तक धैर्य से काम लो, तुम तो हमारी आँखों में हो, और जब उठो तो अपने रब का गुणगान करो","रात की कुछ घड़ियों में भी उसकी तसबीह करो, और सितारों के पीठ फेरने के समय (प्रातःकाल) भी"],"n":"अत-तूर"},{"i":53,"v":["गवाह है तारा, जब वह नीचे को आए","तुम्हारी साथी (मुहम्मह सल्ल॰) न गुमराह हुआ और न बहका","और न वह अपनी इच्छा से बोलता है","वह तो बस एक प्रकाशना है, जो की जा रही है","उसे बड़ी शक्तियोंवाले ने सिखाया","स्थिर रीतिवाले ने।","अतः वह भरपूर हुआ, इस हाल में कि वह क्षितिज के उच्चतम छोर पर है","फिर वह निकट हुआ और उतर गया","अब दो कमानों के बराबर या उससे भी अधिक निकट हो गया","तब उसने अपने बन्दे की ओर प्रकाशना की, जो कुछ प्रकाशना की।","दिल ने कोई धोखा नहीं दिया, जो कुछ उसने देखा","अब क्या तुम उस चीज़ पर झगड़ते हो, जिसे वह देख रहा है","और निश्चय ही वह उसे एक बार और","सिदरतुल मुन्तहा' (परली सीमा के बेर) के पास उतरते देख चुका है","उसी के निकट 'जन्नतुल मावा' (ठिकानेवाली जन्नत) है।","जबकि छा रहा था उस बेर पर, जो कुछ छा रहा था","निगाह न तो टेढ़ी हुइ और न हद से आगे बढ़ी","निश्चय ही उसने अपने रब की बड़ी-बड़ी निशानियाँ देखीं","तो क्या तुमने लात और उज़्ज़ा","और तीसरी एक और (देवी) मनात पर विचार किया","क्या तुम्हारे लिए तो बेटे है उनके लिए बेटियाँ","तब तो यह बहुत बेढ़ंगा और अन्यायपूर्ण बँटवारा हुआ","वे तो बस कुछ नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए है। अल्लाह ने उनके लिए कोई सनद नहीं उतारी। वे तो केवल अटकल के पीछे चले रहे है और उनके पीछे जो उनके मन की इच्छा होती है। हालाँकि उनके पास उनके रब की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है","(क्या उनकी देवियाँ उन्हें लाभ पहुँचा सकती है) या मनुष्य वह कुछ पा लेगा, जिसकी वह कामना करता है","आख़िरत और दुनिया का मालिक तो अल्लाह ही है","आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते है, उनकी सिफ़ारिश कुछ काम नहीं आएगी; यदि काम आ सकती है तो इसके पश्चात ही कि अल्लाह अनुमति दे, जिसे चाहे और पसन्द करे।","जो लोग आख़िरत को नहीं मानते, वे फ़रिश्तों के देवियों के नाम से अभिहित करते है","हालाँकि इस विषय में उन्हें कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अटकल के पीछे चलते है, हालाँकि सत्य से जो लाभ पहुँचता है वह अटकल से कदापि नहीं पहुँच सकता।","अतः तुम उसको ध्यान में न लाओ जो हमारे ज़िक्र से मुँह मोड़ता है और सांसारिक जीवन के सिवा उसने कुछ नहीं चाहा","ऐसे लोगों के ज्ञान की पहुँच बस यहीं तक है। निश्चय ही तुम्हारा रब ही उसे भली-भाँति जानता है जो उसके मार्ग से भटक गया और वही उसे भी भली-भाँति जानता है जिसने सीधा मार्ग अपनाया","अल्लाह ही का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, ताकि जिन लोगों ने बुराई की वह उन्हें उनके किए का बदला दे। और जिन लोगों ने भलाई की उन्हें अच्छा बदला दे","वे लोग जो बड़े गुनाहों और अश्लील कर्मों से बचते है, यह और बात है कि संयोगबश कोई छोटी बुराई उनसे हो जाए। निश्चय ही तुम्हारा रब क्षमाशीलता मे बड़ा व्यापक है। वह तुम्हें उस समय से भली-भाँति जानता है, जबकि उसने तुम्हें धरती से पैदा किया और जबकि तुम अपनी माँओ के पेटों में भ्रुण अवस्था में थे। अतः अपने मन की पवित्रता और निखार का दावा न करो। वह उस व्यक्ति को भली-भाँति जानता है, जिसने डर रखा","क्या तुमने उस व्यक्ति को देखा जिसने मुँह फेरा","और थोड़ा-सा देकर रुक गया","क्या उसके पास परोक्ष का ज्ञान है कि वह देख रहा है","या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची, जो मूसा की किताबों में है","और इबराहीम की (किताबों में है), जिसने अल्लाह की बन्दगी का) पूरा-पूरा हक़ अदा कर दिया","यह कि कोई बोझ उठानेवाला किसी दूसरे का बोझ न उठाएगा","और यह कि मनुष्य के लिए बस वही है जिसके लिए उसने प्रयास किया","और यह कि उसका प्रयास शीघ्र ही देखा जाएगा।","फिर उसे पूरा बदला दिया जाएगा","और यह कि अन्त में पहुँचना तुम्हारे रब ही की ओर है","और यह कि वही है जो हँसाता और रुलाता है","और यह कि वही जो मारता और जिलाता है","और यह कि वही है जिसने नर और मादा के जोड़े पैदा किए","एक बूँद से, जब वह टपकाई जाती है","और यह कि उसी के ज़िम्मे दोबारा उठाना भी है","और यह कि वही है जिसने धनी और पूँजीपति बनाया","और यह कि वही है जो शेअरा (नामक तारे) का रब है","और यह कि वही है उसी ने प्राचीन आद को विनष्ट किया","और समूद को भी। फिर किसी को बाक़ी न छोड़ा।","और उससे पहले नूह की क़ौम को भी। बेशक वे ज़ालिम और सरकश थे","उलट जानेवाली बस्ती को भी फेंक दिया।","तो ढँक लिया उसे जिस चीज़ ने ढँक लिया","फिर तू अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस के विषय में संदेह करेगा","यह पहले के सावधान-कर्ताओं के सदृश एक सावधान करनेवाला है","निकट आनेवाली (क़ियामत की घड़ी) निकट आ गई","अल्लाह के सिवा कोई नहीं जो उसे प्रकट कर दे","अब क्या तुम इस वाणी पर आश्चर्य करते हो","और हँसते हो और रोते नहीं","जबकि तुम घमंडी और ग़ाफिल हो","अतः अल्लाह को सजदा करो और बन्दगी करो"],"n":"अन-नज्म"},{"i":54,"v":["वह घड़ी निकट और लगी और चाँद फट गया","किन्तु हाल यह है कि यदि वे कोई निशानी देख भी लें तो टाल जाएँगे और कहेंगे, \"यह तो जादू है, पहले से चला आ रहा है","उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का अनुसरण किया; किन्तु हर मामले के लिए एक नियत अवधि है।","उनके पास अतीत को ऐसी खबरें आ चुकी है, जिनमें ताड़ना अर्थात पूर्णतः तत्वदर्शीता है।","किन्तु चेतावनियाँ उनके कुछ काम नहीं आ रही है","अतः उनसे रुख़ फेर लो - जिस दिन पुकारनेवाला एक अत्यन्त अप्रिय चीज़ की ओर पुकारेगा","वे अपनी झुकी हुई निगाहों के साथ अपनी क्रबों से निकल रहे होंगे, मानो वे बिखरी हुई टिड्डियाँ है","दौड़ पड़ने को पुकारनेवाले की ओर। इनकार करनेवाले कहेंगे, \"यह तो एक कठिन दिन है","उनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया। उन्होंने हमारे बन्दे को झूठा ठहराया और कहा, \"यह तो दीवाना है!\" और वह बुरी तरह झिड़का गया","अन्त में उसने अपने रब को पुकारा कि \"मैं दबा हुआ हूँ। अब तू बदला ले।","तब हमने मूसलाधार बरसते हुए पानी से आकाश के द्वार खोल दिए","और धरती को प्रवाहित स्रोतों में परिवर्तित कर दिया, और सारा पानी उस काम के लिए मिल गया जो नियत हो चुका था","और हमने उसे एक तख़्तों और कीलोंवाली (नौका) पर सवार किया","जो हमारी निगाहों के सामने चल रही थी - यह बदला था उस व्यक्ति के लिए जिसकी क़द्र नहीं की गई।","हमने उसे एक निशानी बनाकर छोड़ दिया; फिर क्या कोई नसीहत हासिल करनेवाला","फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे","और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत करनेवाला","आद ने भी झुठलाया, फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरा डराना","निश्चय ही हमने एक निरन्तर अशुभ दिन में तेज़ प्रचंड ठंडी हवा भेजी, उसे उनपर मुसल्लत कर दिया, तो वह लोगों को उखाड़ फेंक रही थी","मानो वे उखड़े खजूर के तने हो","फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे","और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला","समूद ने चेतावनियों को झुठलाया","और कहने लगे, \"एक अकेला आदमी, जो हम ही में से है, क्या हम उसके पीछे चलेंगे? तब तो वास्तव में हम गुमराही और दीवानापन में पड़ गए","क्या हमारे बीच उसी पर अनुस्मृति उतारी है? नहीं, बल्कि वह तो परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है।","कल को ही वे जान लेंगे कि कौन परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है।","हम ऊँटनी को उनके लिए परीक्षा के रूप में भेज रहे है। अतः तुम उन्हें देखते जाओ और धैर्य से काम लो","और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। हर एक पीने की बारी पर बारीवाला उपस्थित होगा।","अन्ततः उन्होंने अपने साथी को पुकारा, तो उसने ज़िम्मा लिया फिर उसने उसकी कूचें काट दी","फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे","हमने उनपर एक धमाका छोड़ा, फिर वे बाड़ लगानेवाले की रौंदी हुई बाड़ की तरह चूरा होकर रह गए","हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या कोई नसीहत हासिल करनेवाला","लूत की क़ौम ने भी चेतावनियों को झुठलाया","हमने लूत के घरवालों के सिवा उनपर पथराव करनेवाली तेज़ वायु भेजी।","हमने अपनी विशेष अनुकम्पा से प्रातःकाल उन्हें बचा लिया। हम इसी तरह उस व्यक्ति को बदला देते है जो कृतज्ञता दिखाए","उसने जो उन्हें हमारी पकड़ से सावधान कर दिया था। किन्तु वे चेतावनियों के विषय में संदेह करते रहे","उन्होंने उसे फुसलाकर उसके पास से उसके अतिथियों को बलाना चाहा। अन्ततः हमने उसकी आँखें मेट दीं, \"लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का","सुबह सवेरे ही एक अटल यातना उनपर आ पहुँची","लो, अब चखो मज़ा मेरी यातना और चेतावनियों का","और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला","और फ़िरऔनियों के पास चेतावनियाँ आई","उन्होंने हमारी सारी निशानियों को झुठला दिया। अन्ततः हमने उन्हें पकड़ लिया, जिस प्रकार एक ज़बरदस्त प्रभुत्वशाली पकड़ता है","क्या तुम्हारे काफ़िर कुछ उन लोगो से अच्छे है या किताबों में तुम्हारे लिए कोई छुटकारा लिखा हुआ है","या वे कहते है, \"और हम मुक़ाबले की शक्ति रखनेवाले एक जत्था है","शीघ्र ही वह जत्था पराजित होकर रहेगा और वे पीठ दिखा जाएँगे","नहीं, बल्कि वह घड़ी है, जिसका समय उनके लिए नियत है और वह बड़ी आपदावाली और कटु घड़ी है","निस्संदेह, अपराधी लोग गुमराही और दीवानेपन में पड़े हुए है","जिस दिन वे अपने मुँह के बल आग में घसीटे जाएँगे, \"चखो मज़ा आग की लपट का","निश्चय ही हमने हर चीज़ एक अंदाज़े के साथ पैदा की है","और हमारा आदेश (और काम) तो बस एक दम की बात होती है जैसे आँख का झपकना","और हम तुम्हारे जैसे लोगों को विनष्ट कर चुके है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला","जो कुछ उन्होंने किया है, वह पन्नों में अंकित है","और हर छोटी और बड़ी चीज़ लिखित है","निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ो और नहरों के बीच होंगे","प्रतिष्ठित स्थान पर, प्रभुत्वशाली सम्राट के निकट"],"n":"अल-क़मर"},{"i":55,"v":["रहमान ने","क़ुरआन सिखाया","उसी ने मनुष्य को पैदा किया","उसे बोलना सिखाया","सूर्य और चन्द्रमा एक हिसाब के पाबन्द है","और तारे और वृक्ष सजदा करते है","उसने आकाश को ऊँचा किया और संतुलन स्थापित किया","कि तुम भी तुला में सीमा का उल्लंघन न करो","न्याय के साथ ठीक-ठीक तौलो और तौल में कमी न करो।","और धरती को उसने सृष्टल प्राणियों के लिए बनाया","उसमें स्वादिष्ट फल है और खजूर के वृक्ष है, जिनके फल आवरणों में लिपटे हुए है","और भुसवाले अनाज भी और सुगंधित बेल-बूटा भी","तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उसने मनुष्य को ठीकरी जैसी खनखनाती हुए मिट्टी से पैदा किया","और जिन्न को उसने आग की लपट से पैदा किया","फिर तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे","वह दो पूर्व का रब है और दो पश्चिम का रब भी।","फिर तुम दोनों अपने रब की महानताओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उसने दो समुद्रो को प्रवाहित कर दिया, जो आपस में मिल रहे होते है।","उन दोनों के बीच एक परदा बाधक होता है, जिसका वे अतिक्रमण नहीं करते","तो तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","उन (समुद्रों) से मोती और मूँगा निकलता है।","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","उसी के बस में है समुद्र में पहाड़ो की तरह उठे हुए जहाज़","तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओग","प्रत्येक जो भी इस (धरती) पर है, नाशवान है","किन्तु तुम्हारे रब का प्रतापवान और उदार स्वरूप शेष रहनेवाला है","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगं","आकाशों और धरती में जो भी है उसी से माँगता है। उसकी नित्य नई शान है","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","ऐ दोनों बोझों! शीघ्र ही हम तुम्हारे लिए निवृत हुए जाते है","तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","ऐ जिन्नों और मनुष्यों के गिरोह! यदि तुममें हो सके कि आकाशों और धरती की सीमाओं को पार कर सको, तो पार कर जाओ; तुम कदापि पार नहीं कर सकते बिना अधिकार-शक्ति के","अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे","अतः तुम दोनों पर अग्नि-ज्वाला और धुएँवाला अंगारा (पिघला ताँबा) छोड़ दिया जाएगा, फिर तुम मुक़ाबला न कर सकोगे।","अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे","फिर जब आकाश फट जाएगा और लाल चमड़े की तरह लाल हो जाएगा।","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","फिर उस दिन न किसी मनुष्य से उसके गुनाह के विषय में पूछा जाएगा न किसी जिन्न से","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","अपराधी अपने चहरों से पहचान लिए जाएँगे और उनके माथे के बालों और टाँगों द्वारा पकड़ लिया जाएगा","अतः तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे","यही वह जहन्नम है जिसे अपराधी लोग झूठ ठहराते रहे है","वे उनके और खौलते हुए पानी के बीच चक्कर लगा रहें होंगे","फिर तुम दोनों अपने रब के सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे","किन्तु जो अपने रब के सामने खड़े होने का डर रखता होगा, उसके लिए दो बाग़ है।","तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","घनी डालियोंवाले","अतः तुम दोनों अपने रब के उपकारों में से किस-किस को झुठलाओगे","उन दोनो (बाग़ो) में दो प्रवाहित स्रोत है।","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उन दोनों (बाग़ो) मे हर स्वादिष्ट फल की दो-दो किस्में हैं","अतः तुम दोनो रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","वे ऐसे बिछौनो पर तकिया लगाए हुए होंगे जिनके अस्तर गाढे रेशम के होंगे, और दोनों बाग़ो के फल झुके हुए निकट ही होंगे।","अतः तुम अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","उन (अनुकम्पाओं) में निगाह बचाए रखनेवाली (सुन्दर) स्त्रियाँ होंगी, जिन्हें उनसे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया और न किसी जिन्न ने","फिर तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","मानो वे लाल (याकूत) और प्रवाल (मूँगा) है।","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","अच्छाई का बदला अच्छाई के सिवा और क्या हो सकता है","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उन दोनों से हटकर दो और बाग़ है।","फिर तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","गहरे हरित","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उन दोनों (बाग़ो) में दो स्रोत है जोश मारते हुए","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","उनमें है स्वादिष्ट फल और खजूर और अनार","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","उनमें भली और सुन्दर स्त्रियाँ होंगी।","तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","हूरें (परम रूपवती स्त्रियाँ) ख़ेमों में रहनेवाली","अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे","जिन्हें उससे पहले न किसी मनुष्य ने हाथ लगाया होगा और न किसी जिन्न ने।","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","वे हरे रेशमी गद्दो और उत्कृष्ट् और असाधारण क़ालीनों पर तकिया लगाए होंगे","अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे","बड़ा ही बरकतवाला नाम है तुम्हारे प्रतापवान और उदार रब का"],"n":"अर-रहमान"},{"i":56,"v":["जब घटित होनेवाली (घड़ी) घटित हो जाएगी","उसके घटित होने में कुछ भी झुठ नहीं","पस्त करनेवाली होगी, ऊँचा करनेवाली थी","जब धरती थरथराकर काँप उठेगी","और पहाड़ टूटकर चूर्ण-विचुर्ण हो जाएँगे","कि वे बिखरे हुए धूल होकर रह जाएँगे","और तुम लोग तीन प्रकार के हो जाओगे","तो दाहिने हाथ वाले (सौभाग्यशाली), कैसे होंगे दाहिने हाथ वाले","और बाएँ हाथ वाले (दुर्भाग्यशाली), कैसे होंगे बाएँ हाथ वाले","और आगे बढ़ जानेवाले तो आगे बढ़ जानेवाले ही है","वही (अल्लाह के) निकटवर्ती है","नेमत भरी जन्नतों में होंगे","अगलों में से तो बहुत-से होंगे","किन्तु पिछलों में से कम ही","जड़ित तख़्तो पर","तकिया लगाए आमने-सामने होंगे","उनके पास किशोर होंगे जो सदैव किशोरावस्था ही में रहेंगे","प्याले और आफ़ताबे (जग) और विशुद्ध पेय से भरा हुआ पात्र लिए फिर रहे होंगे","जिस (के पीने) से न तो उन्हें सिर दर्द होगा और न उनकी बुद्धि में विकार आएगा","और स्वादिष्ट॥ फल जो वे पसन्द करें","और पक्षी का मांस जो वे चाह","और बड़ी आँखोंवाली हूरें","मानो छिपाए हुए मोती हो","यह सब उसके बदले में उन्हें प्राप्त होगा जो कुछ वे करते रहे","उसमें वे न कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न गुनाह की बात","सिवाय इस बात के कि \"सलाम हो, सलाम हो","रहे सौभाग्यशाली लोग, तो सौभाग्यशालियों का क्या कहना","वे वहाँ होंगे जहाँ बिन काँटों के बेर होंगे","और गुच्छेदार केले","दूर तक फैली हुई छाँव","बहता हुआ पानी","बहुत-सा स्वादिष्ट; फल","जिसका सिलसिला टूटनेवाला न होगा और न उसपर कोई रोक-टोक होगी","उच्चकोटि के बिछौने होंगे","(और वहाँ उनकी पत्नियों को) निश्चय ही हमने एक विशेष उठान पर उठान पर उठाया","और हमने उन्हे कुँवारियाँ बनाया","प्रेम दर्शानेवाली और समायु","सौभाग्यशाली लोगों के लिए","वे अगलों में से भी अधिक होगे","और पिछलों में से भी अधिक होंगे","रहे दुर्भाग्यशाली लोग, तो कैसे होंगे दुर्भाग्यशाली लोग","गर्म हवा और खौलते हुए पानी में होंगे","और काले धुएँ की छाँव में","जो न ठंडी होगी और न उत्तम और लाभप्रद","वे इससे पहले सुख-सम्पन्न थे","और बड़े गुनाह पर अड़े रहते थे","कहते थे, \"क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ होकर रहे जाएँगे, तो क्या हम वास्तव में उठाए जाएँगे","और क्या हमारे पहले के बाप-दादा भी","कह दो, \"निश्चय ही अगले और पिछले भी","एक नियत समय पर इकट्ठे कर दिए जाएँगे, जिसका दिन ज्ञात और नियत है","फिर तुम ऐ गुमराहो, झुठलानेवालो","ज़क्कूम के वृक्ष में से खाओंगे","और उसी से पेट भरोगे","और उसके ऊपर से खौलता हुआ पानी पीओगे","और तौस लगे ऊँट की तरह पीओगे।","यह बदला दिए जाने के दिन उनका पहला सत्कार होगा","हमने तुम्हें पैदा किया; फिर तुम सच क्यों नहीं मानते","तो क्या तुमने विचार किया जो चीज़ तुम टपकाते हो","क्या तुम उसे आकार देते हो, या हम है आकार देनेवाले","हमने तुम्हारे बीच मृत्यु को नियत किया है और हमारे बस से यह बाहर नहीं है","कि हम तुम्हारे जैसों को बदल दें और तुम्हें ऐसी हालत में उठा खड़ा करें जिसे तुम जानते नहीं","तुम तो पहली पैदाइश को जान चुके हो, फिर तुम ध्यान क्यों नहीं देते","फिर क्या तुमने देखा तो कुछ तुम खेती करते हो","क्या उसे तुम उगाते हो या हम उसे उगाते है","यदि हम चाहें तो उसे चूर-चूर कर दें। फिर तुम बातें बनाते रह जाओ","कि \"हमपर उलटा डाँड पड़ गया","बल्कि हम वंचित होकर रह गए","फिर क्या तुमने उस पानी को देखा जिसे तुम पीते हो","क्या उसे बादलों से तुमने पानी बरसाया या बरसानेवाले हम है","यदि हम चाहें तो उसे अत्यन्त खारा बनाकर रख दें। फिर तुम कृतज्ञता क्यों नहीं दिखाते","फिर क्या तुमने उस आग को देखा जिसे तुम सुलगाते हो","क्या तुमने उसके वृक्ष को पैदा किया है या पैदा करनेवाले हम है","हमने उसे एक अनुस्मृति और मरुभुमि के मुसाफ़िरों और ज़रूरतमन्दों के लिए लाभप्रद बनाया","अतः तुम अपने महान रब के नाम की तसबीह करो","अतः नहीं! मैं क़समों खाता हूँ सितारों की स्थितियों की","और यह बहुत बड़ी गवाही है, यदि तुम जानो","निश्चय ही यह प्रतिष्ठित क़ुरआन है","एक सुरक्षित किताब में अंकित है।","उसे केवल पाक-साफ़ व्यक्ति ही हाथ लगाते है","उसका अवतरण सारे संसार के रब की ओर से है।","फिर क्या तुम उस वाणी के प्रति उपेक्षा दर्शाते हो","और तुम इसको अपनी वृत्ति बना रहे हो कि झुठलाते हो","फिर ऐसा क्यों नहीं होता, जबकि प्राण कंठ को आ लगते है","और उस समय तुम देख रहे होते हो","और हम तुम्हारी अपेक्षा उससे अधिक निकट होते है। किन्तु तुम देखते नहीं –","फिर ऐसा क्यों नहीं होता कि यदि तुम अधीन नहीं हो","तो उसे (प्राण को) लौटा दो, यदि तुम सच्चे हो","फिर यदि वह (अल्लाह के) निकटवर्तियों में से है","तो (उसके लिए) आराम, सुख-सामग्री और सुगंध है, और नेमतवाला बाग़ है","और यदि वह भाग्यशालियों में से है","तो \"सलाम है तुम्हें कि तुम सौभाग्यशाली में से हो।","किन्तु यदि वह झुठलानेवालों, गुमराहों में से है","तो उसका पहला सत्कार खौलते हुए पानी से होगा","फिर भड़कती हुई आग में उन्हें झोंका जाना है","निस्संदेह यही विश्वसनीय सत्य है","अतः तुम अपने महान रब की तसबीह करो"],"n":"अल-वाक़ि'अह"},{"i":57,"v":["अल्लाह की तसबीह की हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है। वही प्रभुत्वशाली, तत्वशाली है","आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है। वही जीवन प्रदान करता है और मृत्यु देता है, और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है","वही आदि है और अन्त भी और वही व्यक्त है और अव्यक्त भी। और वह हर चीज़ को जानता है","वही है जिसने आकाशों और धरती को छह दिनों में पैदा किया; फिर सिंहासन पर विराजमान हुआ। वह जानता है जो कुछ धरती में प्रवेश करता है और जो कुछ उससे निकलता है और जो कुछ आकाश से उतरता है और जो कुछ उसमें चढ़ता है। और तुम जहाँ कहीं भी हो, वह तुम्हारे साथ है। और अल्लाह देखता है जो कुछ तुम करते हो","आकाशों और धरती की बादशाही उसी की है और अल्लाह ही की है ओर सारे मामले पलटते है","वह रात को दिन में प्रविष्ट कराता है और दिन को रात में प्रविष्ट कराता है। वह सीनों में छिपी बात तक को जानता है","ईमान लाओ अल्लाह और उसके रसूल पर और उसमें से ख़र्च करो जिसका उसने तु्म्हें अधिकारी बनाया है। तो तुममें से जो लोग ईमान लाए और उन्होंने ख़र्च किया, उसने लिए बड़ा प्रतिदान है","तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह पर ईमान नहीं लाते; जबकि रसूल तुम्हें निमंत्रण दे रहा है कि तुम अपने रब पर ईमान लाओ और वह तुमसे दृढ़ वचन भी ले चुका है, यदि तुम मोमिन हो","वही है जो अपने बन्दों पर स्पष्ट आयतें उतार रहा है, ताकि वह तुम्हें अंधकारों से प्रकाश की ओर ले आए। और वास्तविकता यह है कि अल्लाह तुमपर अत्यन्त करुणामय, दयावान है","और तुम्हें क्यो हुआ है कि तुम अल्लाह के मार्ग में ख़र्च न करो, हालाँकि आकाशों और धरती की विरासत अल्लाह ही के लिए है? तुममें से जिन लोगों ने विजय से पूर्व ख़र्च किया और लड़े वे परस्पर एक-दूसरे के समान नहीं है। वे तो दरजे में उनसे बढ़कर है जिन्होंने बाद में ख़र्च किया और लड़े। यद्यपि अल्लाह ने प्रत्येक से अच्छा वादा किया है। अल्लाह उसकी ख़बर रखता है, जो कुछ तुम करते हो","कौन है जो अल्लाह को ऋण दे, अच्छा ऋण कि वह उसे उसके लिए कई गुना कर दे। और उसके लिए सम्मानित प्रतिदान है","जिस दिन तुम मोमिन पुरुषों और मोमिन स्त्रियों को देखोगे कि उनका प्रकाश उनके आगे-आगे दौड़ रहा है और उनके दाएँ हाथ में है। (कहा जाएगा,) \"आज शुभ सूचना है तुम्हारे लिए ऐसी जन्नतों की जिनके नीचे नहरें बह रही है, जिनमें सदैव रहना है। वही बड़ी सफलता है।","जिस दिन कपटाचारी पुरुष और कपटाचारी स्त्रियाँ मोमिनों से कहेंगी, \"तनिक हमारी प्रतिक्षा करो। हम भी तुम्हारे प्रकाश मे से कुछ प्रकाश ले लें!\" कहा जाएगा, \"अपने पीछे लौट जाओ। फिर प्रकाश तलाश करो!\" इतने में उनके बीच एक दीवार खड़ी कर दी जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा। उसके भीतर का हाल यह होगा कि उसमें दयालुता होगी और उसके बाहर का यह कि उस ओर से यातना होगी","वे उन्हें पुकारकर कहेंगे, \"क्या हम तुम्हारे साथी नहीं थे?\" वे कहेंगे, \"क्यों नहीं? किन्तु तुमने तो अपने आपको फ़ितने (गुमराही) में डाला और प्रतीक्षा करते रहे और सन्देह में पड़े रहे और कामनाओं ने तुम्हें धोखे में डाले रखा है","अब आज न तुमसे कोई फ़िदया (मुक्ति-प्रतिदान) लिया जाएगा और न उन लोगों से जिन्होंने इनकार किया। तुम्हारा ठिकाना आग है, और वही तुम्हारी संरक्षिका है। और बहुत ही बुरी जगह है अन्त में पहुँचने की","क्या उन लोगों के लिए, जो ईमान लाए, अभी वह समय नहीं आया कि उनके दिल अल्लाह की याद के लिए और जो सत्य अवतरित हुआ है उसके आगे झुक जाएँ? और वे उन लोगों की तरह न हो जाएँ, जिन्हें किताब दी गई थी, फिर उनपर दीर्ध समय बीत गया। अन्ततः उनके दिल कठोर हो गए और उनमें से अधिकांश अवज्ञाकारी रहे","जान लो, अल्लाह धरती को उसकी मृत्यु के पश्चात जीवन प्रदान करता है। हमने तुम्हारे लिए आयतें खोल-खोलकर बयान कर दी है, ताकि तुम बुद्धि से काम लो","निश्चय ही जो सदका देनेवाले पुरुष और सदका देनेवाली स्त्रियाँ है और उन्होंने अल्लाह को अच्छा ऋण दिया, उसे उसके लिए कई गुना कर दिया जाएगा। और उनके लिए सम्मानित प्रतिदान है","जो लोग अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए, वही अपने रब के यहाण सिद्दीक और शहीद है। उनके लिए उनका प्रतिदान और उनका प्रकाश है। किन्तु जिन लोगों ने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही भड़कती आगवाले हैं","जान लो, सांसारिक जीवन तो बस एक खेल और तमाशा है और एक साज-सज्जा, और तुम्हारा आपस में एक-दूसरे पर बड़ाई जताना, और धन और सन्तान में परस्पर एक-दूसरे से बढ़ा हुआ प्रदर्शित करना। वर्षा का मिसाल की तरह जिसकी वनस्पति ने किसान का दिल मोह लिया। फिर वह पक जाती है; फिर तुम उसे देखते हो कि वह पीली हो गई। फिर वह चूर्ण-विचूर्ण होकर रह जाती है, जबकि आख़िरत में कठोर यातना भी है और अल्लाह की क्षमा और प्रसन्नता भी। सांसारिक जीवन तो केवल धोखे की सुख-सामग्री है","अपने रब की क्षमा और उस जन्नत की ओर अग्रसर होने में एक-दूसरे से बाज़ी ले जाओ, जिसका विस्तार आकाश और धरती के विस्तार जैसा है, जो उन लोगों के लिए तैयार की गई है जो अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाए हों। यह अल्लाह का उदार अनुग्रह है, जिसे चाहता है प्रदान करता है। अल्लाह बड़े उदार अनुग्रह का मालिक है","जो मुसीबतें भी धरती में आती है और तुम्हारे अपने ऊपर, वह अनिवार्यतः एक किताब में अंकित है, इससे पहले कि हम उसे अस्तित्व में लाएँ - निश्चय ही यह अल्लाह के लिए आसान है","(यह बात तुम्हें इसलिए बता दी गई) ताकि तुम उस चीज़ का अफ़सोस न करो जो तुम पर जाती रहे और न उसपर फूल जाओ जो उसने तुम्हें प्रदान की हो। अल्लाह किसी इतरानेवाले, बड़ाई जतानेवाले को पसन्द नहीं करता","जो स्वयं कंजूसी करते है और लोगों को भी कंजूसी करने पर उकसाते है, और जो कोई मुँह मोड़े तो अल्लाह तो निस्पृह प्रशंसनीय है","निश्चय ही हमने अपने रसूलों को स्पष्ट प्रमाणों के साथ भेजा और उनके लिए किताब और तुला उतारी, ताकि लोग इनसाफ़ पर क़ायम हों। और लोहा भी उतारा, जिसमें बड़ी दहशत है और लोगों के लिए कितने ही लाभ है., और (किताब एवं तुला इसलिए भी उतारी) ताकि अल्लाह जान ले कि कौन परोक्ष में रहते हुए उसकी और उसके रसूलों की सहायता करता है। निश्चय ही अल्लाह शक्तिशाली, प्रभुत्वशाली है","हमने नूह और इबराहीम को भेजा और उन दोनों की सन्तान में पैग़म्बरी और क़िताब रख दी। फिर उनमें से किसी ने तो संमार्ग अपनाया; किन्तु उनमें से अधिकतर अवज्ञाकारी थे","फिर उनके पीछ उन्हीं के पद-चिन्हों पर हमने अपने दूसरे रसूलों को भेजा और हमने उनके पीछे मरयम के बेटे ईसा को भेजा और उसे इंजील प्रदान की। और जिन लोगों ने उसका अनुसरण किया, उनके दिलों में हमने करुणा और दया रख दी। रहा संन्यास, तो उसे उन्होंने स्वयं घड़ा था। हमने उसे उनके लिए अनिवार्य नहीं किया था, यदि अनिवार्य किया था तो केवल अल्लाह की प्रसन्नता की चाहत। फिर वे उसका निर्वाह न कर सकें, जैसा कि उनका निर्वाह करना चाहिए था। अतः उन लोगों को, जो उनमें से वास्तव में ईमान लाए थे, उनका बदला हमने (उन्हें) प्रदान किया। किन्तु उनमें से अधिकतर अवज्ञाकारी ही है","ऐ लोगों, जो ईमान लाए हो! अल्लाह का डर रखो और उसके रसूल पर ईमान लाओ। वह तुम्हें अपनी दयालुता का दोहरा हिस्सा प्रदान करेगा और तुम्हारे लिए एक प्रकाश कर देगा, जिसमें तुम चलोगे और तुम्हें क्षमा कर देगा। अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","ताकि किताबवाले यह न समझें कि अल्लाह के अनुग्रह में से वे किसी चीज़ पर अधिकार न प्राप्त कर सकेंगे और यह कि अनुग्रह अल्लाह के हाथ में है, जिसे चाहता है प्रदान करता है। अल्लाह बड़े अनुग्रह का मालिक है"],"n":"अल-हदीद"},{"i":58,"v":["अल्लाह ने उस स्त्री की बात सुन ली जो अपने पति के विषय में तुमसे झगड़ रही है और अल्लाह से शिकायत किए जाती है। अल्लाह तुम दोनों की बातचीत सुन रहा है। निश्चय ही अल्लाह सब कुछ सुननेवाला, देखनेवाला है","तुममें से जो लोग अपनी स्त्रियों से ज़िहार करते हैं, उनकी माएँ वे नहीं है, उनकी माएँ तो वही है जिन्होंने उनको जन्म दिया है। यह अवश्य है कि वे लोग एक अनुचित बात और झूठ कहते है। और निश्चय ही अल्लाह टाल जानेवाला अत्यन्त क्षमाशील है","जो लोग अपनी स्त्रियों से ज़िहार करते हैं; फिर जो बात उन्होंने कही थी उससे रुजू करते है, तो इससे पहले कि दोनों एक-दूसरे को हाथ लगाएँ एक गर्दन आज़ाद करनी होगी। यह वह बात है जिसकी तुम्हें नसीहत की जाती है, और तुम जो कुछ करते हो अल्लाह उसकी ख़बर रखता है","किन्तु जिस किसी को ग़ुलाम प्राप्त न हो तो वह निरन्तर दो माह रोज़े रखे, इससे पहले कि वे दोनों एक-दूसरे को हाथ लगाएँ और जिस किसी को इसकी भी सामर्थ्य न हो तो साठ मुहताजों को भोजन कराना होगा। यह इसलिए कि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमानवाले सिद्ध हो सको। ये अल्लाह की निर्धारित की हुई सीमाएँ है। और इनकार करनेवाले के लिए दुखद यातना है","जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते हैं, वे अपमानित और तिरस्कृत होकर रहेंगे, जैसे उनसे पहले के लोग अपमानित और तिरस्कृत हो चुके है। हमने स्पष्ट आयतें अवतरित कर दी है और इनकार करनेवालों के लिए अपमानजनक यातना है","जिस दिन अल्लाह उन सबको उठा खड़ा करेगा और जो कुछ उन्होंने किया होगा, उससे उन्हें अवगत करा देगा। अल्लाह ने उसकी गणना कर रखी है, और वे उसे भूले हुए है, और अल्लाह हर चीज़ का साक्षी है","क्या तुमने इसको नहीं देखा कि अल्लाह जानता है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है। कभी ऐसा नहीं होता कि तीन आदमियों की गुप्त वार्ता हो और उनके बीच चौथा वह (अल्लाह) न हो। और न पाँच आदमियों की होती है जिसमें छठा वह न होता हो। और न इससे कम की कोई होती है और न इससे अधिक की भी, किन्तु वह उनके साथ होता है, जहाँ कहीं भी वे हो; फिर जो कुछ भी उन्होंने किया होगा क़ियामत के दिन उससे वह उन्हें अवगत करा देगा। निश्चय ही अल्लाह को हर चीज़ का ज्ञान है","क्या तुमने नहीं देखा जिन्हें कानाफूसी से रोका गया था, फिर वे वही करते रहे जिससे उन्हें रोका गया था। वे आपस में गुनाह और ज़्यादती और रसूल की अवज्ञा की कानाफूसी करते है। और जब तुम्हारे पास आते है तो तुम्हारे प्रति अभिवादन के ऐसे शब्द प्रयोग में लाते है जो शब्द अल्लाह ने तुम्हारे लिए अभिवादन के लिए नहीं कहे। और अपने जी में कहते है, \"जो कुछ हम कहते है उसपर अल्लाह हमें यातना क्यों नहीं देता?\" उनके लिए जहन्नम ही काफ़ी है जिसमें वे प्रविष्ट होंगे। वह तो बहुत बुरी जगह है, अन्त नें पहुँचने की","ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम आपस में गुप्त॥ वार्ता करो तो गुनाह और ज़्यादती और रसूल की अवज्ञा की गुप्त वार्ता न करो, बल्कि नेकी और परहेज़गारी के विषय में आपस में एकान्त वार्ता करो। और अल्लाह का डर रखो, जिसके पास तुम इकट्ठे होगे","वह कानाफूसी तो केवल शैतान की ओर से है, ताकि वह उन्हें ग़म में डाले जो ईमान लाए है। हालाँकि अल्लाह की अवज्ञा के बिना उसे कुछ भी हानि पहुँचाने की सामर्थ्य प्राप्त नहीं। और ईमानवालों को तो अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए","ऐ ईमान लानेवालो! जब तुमसे कहा जाए कि मजलिसों में जगह कुशादा कर दे, तो कुशादगी पैदा कर दो। अल्लाह तुम्हारे लिए कुशादगी पैदा करेगा। और जब कहा जाए कि उठ जाओ, तो उठ जाया करो। तुममें से जो लोग ईमान लाए है और उन्हें ज्ञान प्रदान किया गया है, अल्लाह उनके दरजों को उच्चता प्रदान करेगा। जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है","ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम रसूल से अकेले में बात करो तो अपनी गुप्त वार्ता से पहले सदक़ा दो। यह तुम्हारे लिए अच्छा और अधिक पवित्र है। फिर यदि तुम अपने को इसमें असमर्थ पाओ, तो निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","क्या तुम इससे डर गए कि अपनी गुप्त वार्ता से पहले सदक़े दो? जो जब तुमने यह न किया और अल्लाह ने तुम्हें क्षमा कर दिया. तो नमाज़ क़ायम करो, ज़कात देते रहो और अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो। और तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है","क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने ऐसे लोगों को मित्र बनाया जिनपर अल्लाह का प्रकोप हुआ है? वे न तुममें से है और न उनमें से। और वे जानते-बूझते झूठी बात पर क़सम खाते है","अल्लाह ने उनके लिए कठोर यातना तैयार कर रखी है। निश्चय ही बुरा है जो वे कर रहे है","उन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना रखा है। अतः वे अल्लाह के मार्ग से (लोगों को) रोकते है। तो उनके लिए रुसवा करनेवाली यातना है","अल्लाह से बचाने के लिए न उनके माल उनके कुछ काम आएँगे और न उनकी सन्तान। वे आगवाले हैं। उसी में वे सदैव रहेंगे","जिस दिन अल्लाह उन सबको उठाएगा तो वे उसके सामने भी इसी तरह क़समें खाएँगे, जिस तरह तुम्हारे सामने क़समें खाते है और समझते हैं कि वे किसी बुनियाद पर है। सावधान रहो, निश्चय ही वही झूठे है","उनपर शैतान ने पूरी तरह अपना प्रभाव जमा लिया है। अतः उसने अल्लाह की याद को उनसे भुला दिया। वे शैतान की पार्टीवाले हैं। सावधान रहो शैतान की पार्टीवाले ही घाटे में रहनेवाले हैं","निश्चय ही जो लोग अल्लाह और उसके रसूल का विरोध करते है वे अत्यन्त अपमानित लोगों में से है","अल्लाह ने लिए दिया है, \"मैं और मेरे रसूल ही विजयी होकर रहेंगे।\" निस्संदेह अल्लाह शक्तिमान, प्रभुत्वशाली है","तुम उन लोगों को ऐसा कभी नहीं पाओगे जो अल्लाह और अन्तिम दि पर ईमान रखते है कि वे उन लोगों से प्रेम करते हो जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का विरोध किया, यद्यपि वे उनके अपने बाप हों या उनके अपने बेटे हो या उनके अपने भाई या उनके अपने परिवारवाले ही हो। वही लोग हैं जिनके दिलों में अल्लाह ने ईमान को अंकित कर दिया है और अपनी ओर से एक आत्मा के द्वारा उन्हें शक्ति दी है। और उन्हें वह ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी; जहाँ वे सदैव रहेंगे। अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वे भी उससे राज़ी हुए। वे अल्लाह की पार्टी के लोग है। सावधान रहो, निश्चय ही अल्लाह की पार्टीवाले ही सफल है"],"n":"अल-मुजादिलाह"},{"i":59,"v":["अल्लाह की तसबीह की है हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है, और वही प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है","वही है जिसने किताबवालों में से उन लोगों को जिन्होंने इनकार किया, उनके घरों से पहले ही जमावड़े में निकल बाहर किया। तुम्हें गुमान न था कि उनकी गढ़ियाँ अल्लाह से उन्हें बचा लेंगी। किन्तु अल्लाह उनपर वहाँ से आया जिसका उन्हें गुमान भी न था। और उसने उनके दिलों में रोब डाल दिया कि वे अपने घरों को स्वयं अपने हाथों और ईमानवालों के हाथों भी उजाड़ने लगे। अतः शिक्षा ग्रहण करो, ऐ दृष्टि रखनेवालो","यदि अल्लाह ने उनके लिए देश निकाला न लिख दिया होता तो दुनिया में ही वह उन्हें अवश्य यातना दे देता, और आख़िरत में तो उनके लिए आग की यातना है ही","यह इसलिए कि उन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का मुक़ाला करने की कोशिश की। और जो कोई अल्लाह का मुक़ाबला करता है तो निश्चय ही अल्लाह की यातना बहुत कठोर है","तुमने खजूर के जो वृक्ष काटे या उन्हें उनकी जड़ों पर खड़ा छोड़ दिया तो यह अल्लाह ही की अनुज्ञा से हुआ (ताकि ईमानवालों के लिए आसानी पैदा करे) और इसलिए कि वह अवज्ञाकारियों को रुसवा करे","और अल्लाह ने उनसे लेकर अपने रसूल की ओर जो कुछ पलटाया, उसके लिए न तो तुमने घोड़े दौड़ाए और न ऊँट। किन्तु अल्लाह अपने रसूलों को जिसपर चाहता है प्रभुत्व प्रदान कर देता है। अल्लाह को तो हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्ति है","जो कुछ अल्लाह ने अपने रसूल की ओर बस्तियोंवालों से लेकर पलटाया वह अल्लाह और रसूल और (मुहताज) नातेदार और अनाथों और मुहताजों और मुसाफ़िर के लिए है, ताकि वह (माल) तुम्हारे मालदारों ही के बीच चक्कर न लगाता रहे - रसूल जो कुछ तुम्हें दे उसे ले लो और जिस चीज़ से तुम्हें रोक दे उससे रुक जाओ, और अल्लाह का डर रखो। निश्चय ही अल्लाह की यातना बहुत कठोर है।","वह ग़रीब मुहाजिरों के लिए है, जो अपने घरों और अपने मालों से इस हालत में निकाल बाहर किए गए है कि वे अल्लाह का उदार अनुग्रह और उसकी प्रसन्नता की तलाश में है और अल्लाह और उसके रसूल की सहायता कर रहे है, और वही वास्तव में सच्चे है","और उनके लिए जो उनसे पहले ही से हिजरत के घर (मदीना) में ठिकाना बनाए हुए है और ईमान पर जमे हुए है, वे उनसे प्रेम करते है जो हिजरत करके उनके यहाँ आए है और जो कुछ भी उन्हें दिया गया उससे वे अपने सीनों में कोई खटक नहीं पाते और वे उन्हें अपने मुक़ाबले में प्राथमिकता देते है, यद्यपि अपनी जगह वे स्वयं मुहताज ही हों। और जो अपने मन के लोभ और कृपणता से बचा लिया जाए ऐसे लोग ही सफल है","और (इस माल में उनका भी हिस्सा है) जो उनके बाद आए, वे कहते है, \"ऐ हमारे रब! हमें क्षमा कर दे और हमारे उन भाइयों को भी जो ईमानलाने में हमसे अग्रसर रहे और हमारे दिलों में ईमानवालों के लिए कोई विद्वेष न रख। ऐ हमारे रब! तू निश्चय ही बड़ा करुणामय, अत्यन्त दयावान है।","क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिन्होंने कपटाचार की नीति अपनाई हैं, वे अपने किताबवाले उन भाइयों से, जो इनकार की नीति अपनाए हुए है, कहते है, \"यदि तुम्हें निकाला गया तो हम भी अवश्य ही तुम्हारे साथ निकल जाएँगे और तुम्हारे मामले में किसी की बात कभी भी नहीं मानेंगे। और यदि तुमसे युद्ध किया गया तो हम अवश्य तुम्हारी सहायता करेंगे।\" किन्तु अल्लाह गवाही देता है कि वे बिलकुल झूठे है","यदि वे निकाले गए तो वे उनके साथ नहीं निकलेंगे और यदि उनसे युद्ध हुआ तो वे उनकी सहायता कदापि न करेंगे और यदि उनकी सहायता करें भी तो पीठ फेंर जाएँगे। फिर उन्हें कोई सहायता प्राप्त न होगी","उनके दिलों में अल्लाह से बढ़कर तुम्हारा भय समाया हुआ है। यह इसलिए कि वे ऐसे लोग है जो समझते नहीं","वे इकट्ठे होकर भी तुमसे (खुले मैदान में) नहीं लड़ेगे, क़िलाबन्द बस्तियों या दीवारों के पीछ हों तो यह और बात है। उनकी आपस में सख़्त लड़ाई है। तुम उन्हें इकट्ठा समझते हो! हालाँकि उनके दिल फटे हुए है। यह इसलिए कि वे ऐसे लोग है जो बुद्धि से काम नहीं लेते","उनकी हालत उन्हीं लोगों जैसी है जो उनसे पहले निकट काल में अपने किए के वबाल का मज़ा चख चुके है, और उनके लिए दुखद यातना भी है","इनकी मिसाल शैतान जैसी है कि जब उसने मनुष्य से कहा, \"क़ुफ़्र कर!\" फिर जब वह कुफ़्र कर बैठा तो कहने लगा, \"मैं तुम्हारी ज़िम्मेदारी से बरी हूँ। मैं तो सारे संसार के रब अल्लाह से डरता हूँ।","फिर उन दोनों का परिणाम यह हुआ कि दोनों आग में गए, जहाँ सदैव रहेंगे। और ज़ालिमों का यही बदला है","ऐ ईमान लानेवालो! अल्लाह का डर रखो। और प्रत्येक व्यक्ति को यह देखना चाहिए कि उसने कल के लिए क्या भेजा है। और अल्लाह का डर रखो। जो कुछ भी तुम करते हो निश्चय ही अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है","और उन लोगों की तरह न हो जाना जिन्होंने अल्लाह को भुला दिया। तो उसने भी ऐसा किया कि वे स्वयं अपने आपको भूल बैठे। वही अवज्ञाकारी है","आगवाले और बाग़वाले (जहन्नमवाले और जन्नतवाले) कभी समान नहीं हो सकते। बाग़वाले ही सफ़ल है","यदि हमने इस क़ुरआन को किसी पर्वत पर भी उतार दिया होता तो तुम अवश्य देखते कि अल्लाह के भय से वह दबा हुआ और फटा जाता है। ये मिशालें लोगों के लिए हम इसलिए पेश करते है कि वे सोच-विचार करें","वही अल्लाह है जिसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं, परोक्ष और प्रत्यक्ष को जानता है। वह बड़ा कृपाशील, अत्यन्त दयावान है","वही अल्लाह है जिसके सिवा कोई पूज्य नहीं। बादशाह है अत्यन्त पवित्र, सर्वथा सलामती, निश्चिन्तता प्रदान करनेवाला, संरक्षक, प्रभुत्वशाली, प्रभावशाली (टुटे हुए को जोड़नेवाला), अपनी बड़ाई प्रकट करनेवाला। महान और उच्च है अल्लाह उस शिर्क से जो वे करते है","वही अल्लाह है जो संरचना का प्रारूपक है, अस्तित्व प्रदान करनेवाला, रूप देनेवाला है। उसी के लिए अच्छे नाम है। जो चीज़ भी आकाशों और धरती में है, उसी की तसबीह कर रही है। और वह प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है"],"n":"अल-हाश्र"},{"i":60,"v":["ऐ ईमान लानेवालो! यदि तुम मेरे मार्ग में जिहाद के लिए और मेरी प्रसन्नता की तलाश में निकले हो तो मेरे शत्रुओं और अपने शत्रुओं को मित्र न बनाओ कि उनके प्रति प्रेम दिखाओं, जबकि तुम्हारे पास जो सत्य आया है उसका वे इनकार कर चुके है। वे रसूल को और तुम्हें इसलिए निर्वासित करते है कि तुम अपने रब - अल्लाह पर ईमान लाए हो। तुम गुप्त रूप से उनसे मित्रता की बातें करते हो। हालाँकि मैं भली-भाँति जानता हूँ जो कुछ तुम छिपाते हो और व्यक्त करते हो। और जो कोई भी तुममें से भटक गया","यदि वे तुम्हें पा जाएँ तो तुम्हारे शत्रु हो जाएँ और कष्ट पहुँचाने के लिए तुमपर हाथ और ज़बान चलाएँ। वे तो चाहते है कि काश! तुम भी इनकार करनेवाले हो जाओ","क़ियामत के दिन तुम्हारी नातेदारियाँ कदापि तुम्हें लाभ न पहुँचाएँगी और न तुम्हारी सन्तान ही। उस दिन वह (अल्लाह) तुम्हारे बीच जुदाई डाल देगा। जो कुछ भी तुम करते हो अल्लाह उसे देख रहा होता है","तुम लोगों के लिए इबराहीम में और उन लोगों में जो उसके साथ थे अच्छा आदर्श है, जबकि उन्होंने अपनी क़ौम के लोगों से कह दिया कि \"हम तुमसे और अल्लाह से हटकर जिन्हें तुम पूजते हो उनसे विरक्त है। हमने तुम्हारा इनकार किया और हमारे और तुम्हारे बीच सदैव के लिए वैर और विद्वेष प्रकट हो चुका जब तक अकेले अल्लाह पर तुम ईमान न लाओ।\" इूबराहीम का अपने बाप से यह कहना अपवाद है कि \"मैं आपके लिए क्षमा की प्रार्थना अवश्य करूँगा, यद्यपि अल्लाह के मुक़ाबले में आपके लिए मैं किसी चीज़ पर अधिकार नहीं रखता।\" \"ऐ हमारे रब! हमने तुझी पर भरोसा किया और तेरी ही ओर रुजू हुए और तेरी ही ओर अन्त में लौटना हैं।","ऐ हमारे रब! हमें इनकार करनेवालों के लिए फ़ितना न बना और ऐ हमारे रब! हमें क्षमा कर दे। निश्चय ही तू प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है।","निश्चय ही तुम्हारे लिए उनमें अच्छा आदर्श है और हर उस व्यक्ति के लिए जो अल्लाह और अंतिम दिन की आशा रखता हो। और जो कोई मुँह फेरे तो अल्लाह तो निस्पृह, अपने आप में स्वयं प्रशंसित है","आशा है कि अल्लाह तुम्हारे और उनके बीच, जिनके बीच, जिनसे तुमने शत्रुता मोल ली है, प्रेम-भाव उत्पन्न कर दे। अल्लाह बड़ी सामर्थ्य रखता है और अल्लाह बहुत क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","अल्लाह तुम्हें इससे नहीं रोकता कि तुम उन लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करो और उनके साथ न्याय करो, जिन्होंने तुमसे धर्म के मामले में युद्ध नहीं किया और न तुम्हें तुम्हारे अपने घरों से निकाला। निस्संदेह अल्लाह न्याय करनेवालों को पसन्द करता है","अल्लाह तो तुम्हें केवल उन लोगों से मित्रता करने से रोकता है जिन्होंने धर्म के मामले में तुमसे युद्ध किया और तुम्हें तुम्हारे अपने घरों से निकाला और तुम्हारे निकाले जाने के सम्बन्ध में सहायता की। जो लोग उनसे मित्रता करें वही ज़ालिम है","ऐ ईमान लानेवालो! जब तुम्हारे पास ईमान की दावेदार स्त्रियाँ हिजरत करके आएँ तो तुम उन्हें जाँच लिया करो। यूँ तो अल्लाह उनके ईमान से भली-भाँति परिचित है। फिर यदि वे तुम्हें ईमानवाली मालूम हो, तो उन्हें इनकार करनेवालों (अधर्मियों) की ओर न लौटाओ। न तो वे स्त्रियाँ उनके लिए वैद्य है और न वे उन स्त्रियों के लिए वैद्य है। और जो कुछ उन्होंने ख़र्च किया हो तुम उन्हें दे दो और इसमें तुम्हारे लिए कोई गुनाह नहीं कि तुम उनसे विवाह कर लो, जबकि तुम उन्हें महर अदा कर दो। और तुम स्वयं भी इनकार करनेवाली स्त्रियों के सतीत्व को अपने अधिकार में न रखो। और जो कुछ तुमने ख़र्च किया हो माँग लो। और उन्हें भी चाहिए कि जो कुछ उन्होंने ख़र्च किया हो माँग ले। यह अल्लाह का आदेश है। वह तुम्हारे बीच फ़ैसला करता है। अल्लाह सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है","और यदि तुम्हारी पत्नि यो (के मह्रों) में से कुछ तुम्हारे हाथ से निकल जाए और इनकार करनेवालों (अधर्मियों) की ओर रह जाए, फिर तुम्हारी नौबत आए, जो जिन लोगों की पत्नियों चली गई है, उन्हें जितना उन्होंने ख़र्च किया हो दे दो। और अल्लाह का डर रखो, जिसपर तुम ईमान रखते हो","ऐ नबी! जब तुम्हारे पास ईमानवाली स्त्रियाँ आकर तुमसे इसपर 'बैअत' करे कि वे अल्लाह के साथ किसी चीज़ को साझी नहीं ठहराएँगी और न चोरी करेंगी और न व्यभिचार करेंगी, और न अपनी औलाद की हत्या करेंगी और न अपने हाथों और पैरों को बीच कोई आरोप घड़कर लाएँगी. और न किसी भले काम में तुम्हारी अवज्ञा करेंगी, तो उनसे 'बैअत' ले लो और उनके लिए अल्लाह से क्षमा की प्रार्थना करो। निश्चय ही अत्यन्त बहुत क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","ऐ ईमान लानेवालो! ऐसे लोगों से मित्रता न करो जिनपर अल्लाह का प्रकोप हुआ, वे आख़िरत से निराश हो चुके है, जिस प्रकार इनकार करनेवाले क़ब्रवालों से निराश हो चुके है"],"n":"अल-मुमतहनाह"},{"i":61,"v":["अल्लाह की तसबीह की हर उस चीज़ ने जो आकाशों और धरती में है। वही प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है","ऐ ईमान लानेवालो! तुम वह बात क्यों कहते हो जो करते नहीं","अल्लाह के यहाँ यह अत्यन्त अप्रिय बात है कि तुम वह बात कहो, जो करो नहीं","अल्लाह तो उन लोगों से प्रेम रखता है जो उसके मार्ग में पंक्तिबद्ध होकर लड़ते है मानो वे सीसा पिलाई हुए दीवार है","और याद करो जब मूसा ने अपनी क़ौम के लोगों से कहा, \"ऐ मेरी क़ौम के लोगों! तुम मुझे क्यो दुख देते हो, हालाँकि तुम जानते हो कि मैं तुम्हारी ओर भेजा हुआ अल्लाह का रसूल हूँ?\" फिर जब उन्होंने टेढ़ अपनाई तो अल्लाह ने भी उनके दिल टेढ़ कर दिए। अल्लाह अवज्ञाकारियों को सीधा मार्ग नहीं दिखाता","और याद करो जबकि मरयम के बेटे ईसा ने कहा, \"ऐ इसराईल की संतान! मैं तुम्हारी ओर भेजा हुआ अल्लाह का रसूल हूँ। मैं तौरात की (उस भविष्यवाणी की) पुष्टि करता हूँ जो मुझसे पहले से विद्यमान है और एक रसूल की शुभ सूचना देता हूँ जो मेरे बाद आएगा, उसका नाम अहमद होगा।\" किन्तु वह जब उनके पास स्पट्जो प्रमाणों के साथ आया तो उन्होंने कहा, \"यह तो जादू है।","अब उस व्यक्ति से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा, जो अल्लाह पर थोपकर झूठ घड़े जबकि इस्लाम (अल्लाह के आगे समर्पण करने) का ओर बुलाया जा रहा हो? अल्लाह ज़ालिम लोगों को सीधा मार्ग नहीं दिखाया करता","वे चाहते है कि अल्लाह के प्रकाश को अपने मुँह की फूँक से बुझा दे, किन्तु अल्लाह अपने प्रकाश को पूर्ण करके ही रहेगा, यद्यपि इनकार करनेवालों को अप्रिय ही लगे","वही है जिसने अपने रसूल को मार्गदर्शन और सत्यधर्म के साथ भेजा, ताकि उसे पूरे के पूरे धर्म पर प्रभुत्व प्रदान कर दे, यद्यपि बहुदेवादियों को अप्रिय ही लगे","ऐ ईमान लानेवालो! क्या मैं तुम्हें एक ऐसा व्यापार बताऊँ जो तुम्हें दुखद यातना से बचा ले","तुम्हें ईमान लाना है अल्लाह और उसके रसूल पर, और जिहाद करना है अल्लाह के मार्ग में अपने मालों और अपनी जानों से। यही तुम्हारे लिए उत्तम है, यदि तुम जानो","वह तुम्हारे गुनाहों को क्षमा कर देगा और तुम्हें ऐसे बागों में दाखिल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होगी और उन अच्छे घरों में भी जो सदाबहार बाग़ों में होंगे। यही बड़ी सफलता है","और दूसरी चीज़ भी जो तुम्हें प्रिय है (प्रदान करेगा), \"अल्लाह की ओर से सहायता और निकट प्राप्त होनेवाली विजय,\" ईमानवालों को शुभसूचना दे दो","ऐ ईमान लानेवालों! अल्लाह के सहायक बनो, जैसा कि मरयम के बेटे ईसा ने हवारियों (साथियों) से कहा था, \"कौन है अल्लाह की ओर (बुलाने में) मेरे सहायक?\" हवारियों ने कहा, \"हम है अल्लाह के सहायक।\" फिर इसराईल की संतान में से एक गिरोह ईमान ले आया और एक गिरोह न इनकार किया। अतः हमने उन लोगों को, जो ईमान लाए थे, उनके अपने शत्रुओं के मुकाबले में शक्ति प्रदान की, तो वे छाकर रहे"],"n":"अस-सफ़्फ"},{"i":62,"v":["अल्लाह की तसबीह कर रही है हर वह चीज़ जो आकाशों में है और जो धरती में है, जो सम्राट है, अत्यन्त पवित्र, प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी","वही है जिसने उम्मियों में उन्हीं में से एक रसूल उठाया जो उन्हें उसकी आयतें पढ़कर सुनाता है, उन्हें निखारता है और उन्हें किताब और हिकमत (तत्वदर्शिता) की शिक्षा देता है, यद्यपि इससे पहले तो वे खुली हुई गुमराही में पड़े हुए थे","और उन दूसरे लोगों को भी (किताब और हिकमत की शिक्षा दे) जो अभी उनसे मिले नहीं है, वे उन्हीं में से होंगे। और वही प्रभुत्वशाली, तत्वशाली है","यह अल्लाह का उदार अनुग्रह है, जिसको चाहता है उसे प्रदान करता है। अल्लाह बड़े अनुग्रह का मालिक है","जिन लोगों पर तारात का बोझ डाला गया, किन्तु उन्होंने उसे न उठाया, उनकी मिसाल उस गधे की-सी है जो किताबे लादे हुए हो। बहुत ही बुरी मिसाल है उन लोगों की जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठला दिया। अल्लाह ज़ालिमों को सीधा मार्ग नहीं दिखाया करता","कह दो, \"ऐ लोगों, जो यहूदी हुए हो! यदि तुम्हें यह गुमान है कि सारे मनुष्यों को छोड़कर तुम ही अल्लाह के प्रेमपात्र हो तो मृत्यु की कामना करो, यदि तुम सच्चे हो।","किन्तु वे कभी भी उसकी कामना करेंगे, उस (कर्म) के कारण जो उनके हाथों ने आगे भेजा है। अल्लाह ज़ालिमों को भली-भाँति जानता है","कह दो, \"मृत्यु जिससे तुम भागते हो, वह तो तुम्हें मिलकर रहेगी, फिर तुम उसकी ओर लौटाए जाओगे जो छिपे और खुले का जाननेवाला है। और वह तुम्हें उससे अवगत करा देगा जो कुछ तुम करते रहे होगे।","ऐ ईमान लानेवालो, जब जुमा के दिन नमाज़ के लिए पुकारा जाए तो अल्लाह की याद की ओर दौड़ पड़ो और क्रय-विक्रय छोड़ दो। यह तुम्हारे लिए अच्छा है, यदि तुम जानो","फिर जब नमाज़ पूरी हो जाए तो धरती में फैल जाओ और अल्लाह का उदार अनुग्रह (रोजी) तलाश करो, और अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करते रहो, ताकि तुम सफल हो।","किन्तु जब वे व्यवहार और खेल-तमाशा देखते है तो उसकी ओर टूट पड़ते है और तुम्हें खड़ा छोड़ देते है। कह दो, \"जो कुछ अल्लाह के पास है वह तमाशे और व्यापार से कहीं अच्छा है। और अल्लाह सबसे अच्छा आजीविका प्रदान करनेवाला है।"],"n":"अल-जुमु'अह"},{"i":63,"v":["जब मुनाफ़िक (कपटाचारी) तुम्हारे पास आते है तो कहते है, \"हम गवाही देते है कि निश्चय ही आप अल्लाह के रसूल है।\" अल्लाह जानता है कि निस्संदेह तुम उसके रसूल हो, किेन्तु अल्लाह गवाही देता है कि ये मुनाफ़िक बिलकुल झूठे है","उन्होंने अपनी क़समों को ढाल बना रखा है, इस प्रकार वे अल्लाह के मार्ग से रोकते है। निश्चय ही बुरा है जो वे कर रहे है","यह इस कारण कि वे ईमान लाए, फिर इनकार किया, अतः उनके दिलों पर मुहर लगा दी गई, अब वे कुछ नहीं समझते","तुम उन्हें देखते हो तो उनके शरीर (बाह्य रूप) तुम्हें अच्छे लगते है, औरयदि वे बात करें तो उनकी बात तुम सुनते रह जाओ। किन्तु यह ऐसा ही है मानो वे लकड़ी के कुंदे है, जिन्हें (दीवार के सहारे) खड़ा कर दिया गया हो। हर ज़ोर की आवाज़ को वे अपने ही विरुद्ध समझते है। वही वास्तविक शत्रु हैं, अतः उनसे बचकर रहो। अल्लाह की मार उनपर। वे कहाँ उल्टे फिरे जा रहे है","और जब उनसे कहा जाता है, \"आओ, अल्लाह का रसूल तुम्हारे लिए क्षमा की प्रार्थना करे।\" तो वे अपने सिर मटकाते है और तुम देखते हो कि घमंड के साथ खिंचे रहते है","उनके लिए बराबर है चाहे तुम उनके किए क्षमा की प्रार्थना करो या उनके लिए क्षमा की प्रार्थना न करो। अल्लाह उन्हें कदापि क्षमा न करेगा। निश्चय ही अल्लाह अवज्ञाकारियों को सीधा मार्ग नहीं दिखाया करता","वे वहीं लोग है जो कहते है, \"उन लोगों पर ख़र्च न करो जो अल्लाह के रसूल के पास रहनेवाले है, ताकि वे तितर-बितर हो जाएँ।\" हालाँकि आकाशों और धरती के ख़जाने अल्लाह ही के है, किन्तु वे मुनाफ़िक़ समझते नहीं","वे कहते है, \"यदि हम मदीना लौटकर गए तो जो अधिक शक्तिवाला है, वह हीनतर (व्यक्तियों) को वहाँ से निकाल बाहर करेगा।\" हालाँकि शक्ति अल्लाह और उसके रसूल और मोमिनों के लिए है, किन्तु वे मुनाफ़िक़ जानते नहीं","ऐ ईमान लानेवालो! तुम्हारे माल तुम्हें अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल न कर दें और न तुम्हारी सन्तान ही। जो कोई ऐसा करे तो ऐसे ही लोग घाटे में रहनेवाले है","हमने तुम्हें जो कुछ दिया है उसमें से ख़र्च करो इससे पहले कि तुममें से किसी की मृत्यु आ जाए और उस समय वह करने लगे, \"ऐ मेरे रब! तूने मुझे कुछ थोड़े समय तक और मुहलत क्यों न दी कि मैं सदक़ा (दान) करता (मुझे मुहलत दे कि मैं सदक़ा करूँ) और अच्छे लोगों में सम्मिलित हो जाऊँ।","किन्तु अल्लाह, किसी व्यक्ति को जब तक उसका नियत समय आ जाता है, कदापि मुहलत नहीं देता। और जो कुछ तुम करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है"],"n":"अल-मुनाफ़िकून"},{"i":64,"v":["अल्लाह की तसबीह कर रही है हर वह चीज़ जो आकाशों में है और जो धरती में है। उसी की बादशाही है और उसी के लिए प्रशंसा है और उसे हर चीज़ की सामर्थ्य प्राप्त है","वही है जिसने तुम्हें पैदा किया, फिर तुममें से कोई तो इनकार करनेवाला है और तुममें से कोई ईमानवाला है, और तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसे देख रहा होता है","उसने आकाशों और धरती को हक़ के साथ पैदा किया और तुम्हारा रूप बनाया, तो बहुत ही अच्छे बनाए तुम्हारे रूप और उसी की ओर अन्ततः जाना है","वह जानता है जो कुछ आकाशों और धरती में है और उसे भी जानता है जो कुछ तुम छिपाते हो और जो कुछ तुम प्रकट करते हो। अल्लाह तो सीनों में छिपी बात तक को जानता है","क्या तुम्हें उन लोगों की ख़बर नहीं पहुँची जिन्होंने इससे पहले इनकार किया था, फिर उन्होंने अपने कर्म के वबाल का मज़ा चखा और उनके लिए एक दुखद यातना भी है","यह इस कारण कि उनके पास उनके रसूल स्पष्ट प्रमाण लेकर आते रहे, किन्तु उन्होंने कहा, \"क्या मनुष्य हमें मार्ग दिखाएँगे?\" इस प्रकार उन्होंने इनकार किया और मुँह फेर लिया, तब अल्लाह भी उनसे बेपरवाह हो गया। अल्लाह तो है ही निस्पृह, अपने आप में स्वयं प्रशंसित","जिन लोगों ने इनकार किया उन्होंने दावा किया वे मरने के पश्चात कदापि न उठाए जाएँगे। कह दो, \"क्यों नहीं, मेरे रब की क़सम! तुम अवश्य उठाए जाओगे, फिर जो कुछ तुमने किया है उससे तुम्हें अवगत करा दिया जाएगा। और अल्लाह के लिए यह अत्यन्त सरल है।","अतः ईमान लाओ, अल्लाह पर और उसके रसूल पर और उस प्रकाश पर जिसे हमने अवतरित किया है। तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उसकी पूरी ख़बर रखता है","इकट्ठा होने के दिन वह तुम्हें इकट्ठा करेगा, वह परस्पर लाभ-हानि का दिन होगा। जो भी अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छा कर्म करे उसकी बुराईयाँ अल्लाह उससे दूर कर देगा और उसे ऐसे बाग़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी, उनमें वे सदैव रहेंगे। यही बड़ी सफलता है","रहे वे लोग जिन्होंने इनकार किया और हमारी आयतों को झुठलाया, वही आगवाले है जिसमें वे सदैव रहेंगे। अन्ततः लौटकर पहुँचने की वह बहुत ही बुरी जगह है","अल्लाह की अनुज्ञा के बिना कोई भी मुसीबत नहीं आती। जो अल्लाह पर ईमान ले आए अल्लाह उसके दिल को मार्ग दिखाता है, और अल्लाह हर चीज को भली-भाँति जानता है","अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और रसूल की आज्ञा का पालन करो, किन्तु यदि तुम मुँह मोड़ते हो तो हमारे रसूल पर बस स्पष्ट रूप से (संदेश) पहुँचा देने की ज़िम्मेदारी है","अल्लाह वह है जिसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अतः अल्लाह ही पर ईमानवालों को भरोसा करना चाहिए","ऐ ईमान लानेवालो, तुम्हारी पत्नियों और तुम्हारी सन्तान में से कुछ ऐसे भी है जो तुम्हारे शत्रु है। अतः उनसे होशियार रहो। और यदि तुम माफ़ कर दो और टाल जाओ और क्षमा कर दो निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","तुम्हारे माल और तुम्हारी सन्तान तो केवल एक आज़माइश है, और अल्लाह ही है जिसके पास बड़ा प्रतिदान है","अतः जहाँ तक तुम्हारे बस में हो अल्लाह का डर रखो और सुनो और आज्ञापालन करो और ख़र्च करो अपनी भलाई के लिए। और जो अपने मन के लोभ एवं कृपणता से सुरक्षित रहा तो ऐसे ही लोग सफल है","यदि तुम अल्लाह को अच्छा ऋण दो तो वह उसे तुम्हारे लिए कई गुना बढ़ा देगा और तुम्हें क्षमा कर देगा। अल्लाह बड़ा गुणग्राहक और सहनशील है","परोक्ष और प्रत्यक्ष को जानता है, प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है"],"n":"अत-तगाबुन"},{"i":65,"v":["ऐ नबी! जब तुम लोग स्त्रियों को तलाक़ दो तो उन्हें तलाक़ उनकी इद्दत के हिसाब से दो। और इद्दत की गणना करो और अल्लाह का डर रखो, जो तुम्हारा रब है। उन्हें उनके घरों से न निकालो और न वे स्वयं निकलें, सिवाय इसके कि वे कोई स्पष्ट। अशोभनीय कर्म कर बैठें। ये अल्लाह की नियत की हुई सीमाएँ है - और जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करे तो उसने स्वयं अपने आप पर ज़ुल्म किया - तुम नहीं जानते, कदाचित इस (तलाक़) के पश्चात अल्लाह कोई सूरत पैदा कर दे","फिर जब वे अपनी नियत इद्दत को पहुँचे तो या तो उन्हें भली रीति से रोक लो या भली रीति से अलग कर दो। और अपने में से दो न्यायप्रिय आदमियों को गवाह बना दो और अल्लाह के लिए गवाही को दुरुस्त रखो। इसकी नसीहत उस व्यक्ति को की जाती है जो अल्लाह और अन्तिम दिन पर ईमान रखेगा उसके लिए वह (परेशानी से) निकलने का राह पैदा कर देगा","और उसे वहाँ से रोज़ी देगा जिसका उसे गुमान भी न होगा। जो अल्लाह पर भरोसा करे तो वह उसके लिए काफ़ी है। निश्चय ही अल्लाह अपना काम पूरा करके रहता है। अल्लाह ने हर चीज़ का एक अन्दाजा नियत कर रखा है","और तुम्हारी स्त्रियों में से जो मासिक धर्म से निराश हो चुकी हों, यदि तुम्हें संदेह हो तो उनकी इद्दत तीन मास है और इसी प्रकार उनकी भी जो अभी रजस्वला नहीं हुई। और जो गर्भवती स्त्रियाँ हो उनकी इद्दत उनके शिशु-प्रसव तक है। जो कोई अल्लाह का डर रखेगा उसके मामले में वह आसानी पैदा कर देगा","यह अल्लाह का आदेश है जो उसने तुम्हारी ओर उतारा है। और जो कोई अल्लाह का डर रखेगा उससे वह उसकी बुराईयाँ दूर कर देगा और उसके प्रतिदान को बड़ा कर देगा","अपनी हैसियत के अनुसार यहाँ तुम स्वयं रहते हो उन्हें भी उसी जगह रखो। और उन्हें तंग करने के लिए उन्हें हानि न पहुँचाओ। और यदि वे गर्भवती हो तो उनपर ख़र्च करते रहो जब तक कि उनका शिशु-प्रसव न हो जाए। फिर यदि वे तुम्हारे लिए (शिशु को) दूध पिलाएँ तो तुम उन्हें उनका पारिश्रामिक दो और आपस में भली रीति से परस्पर बातचीत के द्वार कोई बात तय कर लो। और यदि तुम दोनों में कोई कठिनाई हो तो फिर कोई दूसरी स्त्री उसके लिए दूध पिला देगी","चाहिए कि समाई (सामर्थ्य) वाला अपनी समाई के अनुसार ख़र्च करे और जिसे उसकी रोज़ी नपी-तुली मिली हो तो उसे चाहिए कि अल्लाह ने उसे जो कुछ भी दिया है उसी में से वह ख़र्च करे। जितना कुछ दिया है उससे बढ़कर अल्लाह किसी व्यक्ति पर ज़िम्मेदारी का बोझ नहीं डालता। जल्द ही अल्लाह कठिनाई के बाद आसानी पैदा कर देगा","कितनी ही बस्तियाँ हैं जिन्होंने रब और उसके रसूलों के आदेश के मुक़ाबले में सरकशी की, तो हमने उनकी सख़्त पकड़ की और उन्हें बुरी यातना दी","अतः उन्होंने अपने किए के वबाल का मज़ा चख लिया और उनकी कार्य-नीति का परिणाम घाटा ही रहा","अल्लाह ने उनके लिए कठोर यातना तैयार कर रखी है। अतः ऐ बुद्धि और समझवालो जो ईमान लाए हो! अल्लाह का डर रखो। अल्लाह ने तुम्हारी ओर एक याददिहानी उतार दी है","(अर्थात) एक रसूल जो तुम्हें अल्लाह की स्पष्ट आयतें पढ़कर सुनाता है, ताकि वह उन लोगों को, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, अँधेरों से निकालकर प्रकाश की ओर ले आए। जो कोई अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छा कर्म करे, उसे वह ऐसे बाग़़ों में दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें बह रही होगी - ऐसे लोग उनमें सदैव रहेंगे - अल्लाह ने उनके लिए उत्तम रोज़ी रखी है","अल्लाह ही है जिसने सात आकाश बनाए और उन्ही के सदृश धरती से भी। उनके बीच (उसका) आदेश उतरता रहता है ताकि तुम जान लो कि अल्लाह को हर चीज़ का सामर्थ्य प्राप्त है और यह कि अल्लाह हर चीज़ को अपनी ज्ञान-परिधि में लिए हुए है"],"n":"अत-तलाक़"},{"i":66,"v":["ऐ नबी! जिस चीज़ को अल्लाह ने तुम्हारे लिए वैध ठहराया है उसे तुम अपनी पत्नियों की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए क्यो अवैध करते हो? अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है","अल्लाह ने तुम लोगों के लिए तुम्हारी अपनी क़समों की पाबंदी से निकलने का उपाय निश्चित कर दिया है। अल्लाह तुम्हारा संरक्षक है और वही सर्वज्ञ, अत्यन्त तत्वदर्शी है","जब नबी ने अपनी पत्ऩियों में से किसी से एक गोपनीय बात कही, फिर जब उसने उसकी ख़बर कर दी और अल्लाह ने उसे उसपर ज़ाहिर कर दिया, तो उसने उसे किसी हद तक बता दिया और किसी हद तक टाल गया। फिर जब उसने उसकी उसे ख़बर की तो वह बोली, \"आपको इसकी ख़बर किसने दी?\" उसने कहा, \"मुझे उसने ख़बर दी जो सब कुछ जाननेवाला, ख़बर रखनेवाला है।","यदि तुम दोनों अल्लाह की ओर रुजू हो तो तुम्हारे दिल तो झुक ही चुके हैं, किन्तु यदि तुम उसके विरुद्ध एक-दूसरे की सहायता करोगी तो अल्लाह उसकी संरक्षक है, और जिबरील और नेक ईमानवाले भी, और इसके बाद फ़रिश्ते भी उसके सहायक है","इसकी बहुत सम्भावना है कि यदि वह तुम्हें तलाक़ दे दे तो उसका रब तुम्हारे बदले में तुमसे अच्छी पत्ऩियाँ उसे प्रदान करे - मुस्लिम, ईमानवाली, आज्ञाकारिणी, तौबा करनेवाली, इबादत करनेवाली, (अल्लाह के मार्ग में) सफ़र करनेवाली, विवाहिता और कुँवारियाँ भी","ऐ ईमान लानेवालो! अपने आपको और अपने घरवालों को उस आग से बचाओ जिसका ईधन मनुष्य और पत्थर होंगे, जिसपर कठोर स्वभाव के ऐसे बलशाली फ़रिश्ते नियुक्त होंगे जो अल्लाह की अवज्ञा उसमें नहीं करेंगे जो आदेश भी वह उन्हें देगा, और वे वही करेंगे जिसका उन्हें आदेश दिया जाएगा","ऐ इनकार करनेवालो! आज उज़्र पेश न करो। तुम्हें बदले में वही तो दिया जा रहा है जो कुछ तुम करते रहे हो","ऐ ईमान लानेवाले! अल्लाह के आगे तौबा करो, विशुद्ध तौबा। बहुत सम्भव है कि तुम्हारा रब तुम्हारी बुराइयाँ तुमसे दूर कर दे और तुम्हें ऐसे बाग़ों में दाख़िल करे जिनके नीचे नहरे बह रही होंगी, जिस दिन अल्लाह नबी को और उनको जो ईमान लाकर उसके साथ हुए, रुसवा न करेगा। उनका प्रकाश उनके आगे-आगे दौड़ रहा होगा और उनके दाहिने हाथ मे होगा। वे कह रहे होंगे, \"ऐ हमारे रब! हमारे लिए हमारे प्रकाश को पूर्ण कर दे और हमें क्षमा कर। निश्चय ही तू हर चीज़ की सामर्थ्य रखता है।","ऐ नबी! इनकार करनेवालों और कपटाचारियों से जिहाद करो और उनके साथ सख़्ती से पेश आओ। उनका ठिकाना जहन्नम है और वह अन्ततः पहुँचने की बहुत बुरी जगह है","अल्लाह ने इनकार करनेवालों के लिए नूह की स्त्री और लूत की स्त्री की मिसाल पेश की है। वे हमारे बन्दों में से दो नेक बन्दों के अधीन थीं। किन्तु उन दोनों स्त्रियों ने उनसे विश्वासघात किया तो अल्लाह के मुक़ाबले में उनके कुछ काम न आ सके और कह दिया गया, \"प्रवेश करनेवालों के साथ दोनों आग में प्रविष्ट हो जाओ।","और ईमान लानेवालों के लिए अल्लाह ने फ़िरऔन की स्त्री की मिसाल पेश की है, जबकि उसने कहा, \"ऐ मेरे रब! तू मेरे लिए अपने पास जन्नत में एक घर बना और मुझे फ़िरऔन और उसके कर्म से छुटकारा दे, और छुटकारा दे मुझे ज़ालिम लोगों से।","और इमरान की बेटी मरयम की मिसाल पेश ही है जिसने अपने सतीत्व की रक्षा की थी, फिर हमने उस स्त्री के भीतर अपनी रूह फूँक दी और उसने अपने रब के बोलों और उसकी किताबों की पुष्टि की और वह भक्ति-प्रवृत्त आज्ञाकारियों में से थी"],"n":"अत-तहरीम"},{"i":67,"v":["बड़ा बरकतवाला है वह जिसके हाथ में सारी बादशाही है और वह हर चीज़ की सामर्थ्य रखता है।","जिसने पैदा किया मृत्यु और जीवन को, ताकि तुम्हारी परीक्षा करे कि तुममें कर्म की दृष्टि से कौन सबसे अच्छा है। वह प्रभुत्वशाली, बड़ा क्षमाशील है।","जिसने ऊपर-तले सात आकाश बनाए। तुम रहमान की रचना में कोई असंगति और विषमता न देखोगे। फिर नज़र डालो, \"क्या तुम्हें कोई बिगाड़ दिखाई देता है","फिर दोबारा नज़र डालो। निगाह रद्द होकर और थक-हारकर तुम्हारी ओर पलट आएगी","हमने निकटवर्ती आकाश को दीपों से सजाया और उन्हें शैतानों के मार भगाने का साधन बनाया और उनके लिए हमने भड़कती आग की यातना तैयार कर रखी है","जिन लोगों ने अपने रब के साथ कुफ़्र किया उनके लिए जहन्नम की यातना है और वह बहुत ही बुरा ठिकाना है","जब वे उसमें डाले जाएँगे तो उसकी दहाड़ने की भयानक आवाज़ सुनेंगे और वह प्रकोप से बिफर रही होगी।","ऐसा प्रतीत होगा कि प्रकोप के कारण अभी फट पड़ेगी। हर बार जब भी कोई समूह उसमें डाला जाएगा तो उसके कार्यकर्ता उनसे पूछेंगे, \"क्या तुम्हारे पास कोई सावधान करनेवाला नहीं आया","वे कहेंगे, \"क्यों नहीं, अवश्य हमारे पास आया था, किन्तु हमने झुठला दिया और कहा कि अल्लाह ने कुछ भी नहीं अवतरित किया। तुम तो बस एक बड़ी गुमराही में पड़े हुए हो।","और वे कहेंगे, \"यदि हम सुनते या बुद्धि से काम लेते तो हम दहकती आग में पड़नेवालों में सम्मिलित न होते।","इस प्रकार वे अपने गुनाहों को स्वीकार करेंगे, तो धिक्कार हो दहकती आगवालों पर","जो लोग परोक्ष में रहते हुए अपने रब से डरते है, उनके लिए क्षमा और बड़ा बदला है","तुम अपनी बात छिपाओ या उसे व्यक्त करो, वह तो सीनों में छिपी बातों तक को जानता है","क्या वह नहीं जानेगा जिसने पैदा किया? वह सूक्ष्मदर्शी, ख़बर रखनेवाला है","वही तो है जिसने तुम्हारे लिए धरती को वशीभूत किया। अतः तुम उसके (धरती के) कन्धों पर चलो और उसकी रोज़ी में से खाओ, उसी की ओर दोबारा उठकर (जीवित होकर) जाना है","क्या तुम उससे निश्चिन्त हो जो आकाश में है कि तुम्हें धरती में धँसा दे, फिर क्या देखोगे कि वह डाँवाडोल हो रही है","या तुम उससे निश्चिन्त हो जो आकाश में है कि वह तुमपर पथराव करनेवाली वायु भेज दे? फिर तुम जान लोगे कि मेरी चेतावनी कैसी होती है","उन लोगों ने भी झुठलाया जो उनसे पहले थे, फिर कैसा रहा मेरा इनकार","क्या उन्होंने अपने ऊपर पक्षियों को पंक्तबन्द्ध पंख फैलाए और उन्हें समेटते नहीं देखा? उन्हें रहमान के सिवा कोई और नहीं थामें रहता। निश्चय ही वह हर चीज़ को देखता है","या वह कौन है जो तुम्हारी सेना बनकर रहमान के मुक़ाबले में तुम्हारी सहायता करे। इनकार करनेवाले तो बस धोखे में पड़े हुए है","या वह कौन है जो तुम्हें रोज़ी दे, यदि वह अपनी रोज़ी रोक ले? नहीं, बल्कि वे तो सरकशी और नफ़रत ही पर अड़े हुए है","तो क्या वह व्यक्ति जो अपने मुँह के बल औंधा चलता हो वह अधिक सीधे मार्ग पर ह या वह जो सीधा होकर सीधे मार्ग पर चल रहा है","कह दो, \"वही है जिसने तुम्हें पैदा किया और तुम्हारे लिए कान और आँखे और दिल बनाए। तुम कृतज्ञता थोड़े ही दिखाते हो।","कह दो, \"वही है जिसने तुम्हें धरती में फैलाया और उसी की ओर तुम एकत्र किए जा रहे हो।","वे कहते है, \"यदि तुम सच्चे हो तो यह वादा कब पूरा होगा","कह दो, \"इसका ज्ञान तो बस अल्लाह ही के पास है और मैं तो एक स्पष्ट॥ सचेत करनेवाला हूँ।","फिर जब वे उसे निकट देखेंगे तो उन लोगों के चेहरे बिगड़ जाएँगे जिन्होंने इनकार की नीति अपनाई; और कहा जाएगा, \"यही है वह चीज़ जिसकी तुम माँग कर रहे थे।","कहो, \"क्या तुमने यह भी सोचा कि यदि अल्लाह मुझे और उन्हें भी, जो मेरे साथ है, विनष्ट ही कर दे या वह हम पर दया करे, आख़िर इनकार करनेवालों को दुखद यातना से कौन पनाह देगा","कह दो, \"वह रहमान है। उसी पर हम ईमान लाए है और उसी पर हमने भरोसा किया। तो शीघ्र ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि खुली गुमराही में कौन पड़ा हुआ है।","कहो, \"क्या तुमने यह भी सोचा कि यदि तुम्हारा पानी (धरती में) नीचे उतर जाए तो फिर कौन तुम्हें लाकर देगा निर्मल प्रवाहित जल"],"n":"अल-मुल्क"},{"i":68,"v":["नून॰। गवाह है क़लम और वह चीज़ जो वे लिखते है","तुम अपने रब की अनुकम्पा से कोई दीवाने नहीं हो","निश्चय ही तुम्हारे लिए ऐसा प्रतिदान है जिसका क्रम कभी टूटनेवाला नहीं","निस्संदेह तुम एक महान नैतिकता के शिखर पर हो","अतः शीघ्र ही तुम भी देख लोगे और वे भी देख लेंगे","कि तुममें से कौन विभ्रमित है","निस्संदेह तुम्हारा रब उसे भली-भाँति जानता है जो उसके मार्ग से भटक गया है, और वही उन लोगों को भी जानता है जो सीधे मार्ग पर हैं","अतः तुम झुठलानेवालों को कहना न मानना","वे चाहते है कि तुम ढीले पड़ो, इस कारण वे चिकनी-चुपड़ी बातें करते है","तुम किसी भी ऐसे व्यक्ति की बात न मानना जो बहुत क़समें खानेवाला, हीन है","कचोके लगाता, चुग़लियाँ खाता फिरता हैं","भलाई से रोकता है, सीमा का उल्लंघन करनेवाला, हक़ मारनेवाला है","क्रूर है फिर अधम भी।","इस कारण कि वह धन और बेटोंवाला है","जब उसे हमारी आयतें सुनाई जाती है तो कहता है, \"ये तो पहले लोगों की कहानियाँ हैं","शीघ्र ही हम उसकी सूँड पर दाग़ लगाएँगे","हमने उन्हें परीक्षा में डाला है जैसे बाग़वालों को परीक्षा में डाला था, जबकि उन्होंने क़सम खाई कि वे प्रातःकाल अवश्य उस (बाग़) के फल तोड़ लेंगे","और वे इसमें छूट की कोई गुंजाइश नहीं रख रहे थे","अभी वे सो ही रहे थे कि तुम्हारे रब की ओर से गर्दिश का एक झोंका आया","और वह ऐसा हो गया जैसे कटी हुई फ़सल","फिर प्रातःकाल होते ही उन्होंने एक-दूसरे को आवाज़ दी","कि \"यदि तुम्हें फल तोड़ना है तो अपनी खेती पर सवेरे ही पहुँचो।","अतएव वे चुपके-चुपके बातें करते हुए चल पड़े","कि आज वहाँ कोई मुहताज तुम्हारे पास न पहुँचने पाए","और वे आज तेज़ी के साथ चले मानो (मुहताजों को) रोक देने की उन्हें सामर्थ्य प्राप्त है","किन्तु जब उन्होंने उसको देखा, कहने लगे, \"निश्चय ही हम भटक गए है।","नहीं, बल्कि हम वंचित होकर रह गए।","उनमें जो सबसे अच्छा था कहने लगा, \"क्या मैंने तुमसे कहा नहीं था? तुम तसबीह क्यों नहीं करते","वे पुकार उठे, \"महान और उच्च है हमारा रब! निश्चय ही हम ज़ालिम थे।","फिर वे परस्पर एक-दूसरे की ओर रुख़ करके लगे एक-दूसरे को मलामत करने।","उन्होंने कहा, \"अफ़सोस हम पर! निश्चय ही हम सरकश थे।","आशा है कि हमारा रब बदले में हमें इससे अच्छा प्रदान करे। हम अपने रब की ओर उन्मुख है।","यातना ऐसी ही होती है, और आख़िरत की यातना तो निश्चय ही इससे भी बड़ी है, काश वे जानते","निश्चय ही डर रखनेवालों के लिए उनके रब के यहाँ नेमत भरी जन्नतें है","तो क्या हम मुस्लिमों (आज्ञाकारियों) को अपराधियों जैसा कर देंगे","तुम्हें क्या हो गया है, कैसा फ़ैसला करते हो","क्या तुम्हारे पास कोई किताब है जिसमें तुम पढ़ते हो","कि उसमें तुम्हारे लिए वह कुछ है जो तुम पसन्द करो","या तुमने हमसे क़समें ले रखी है जो क़ियामत के दिन तक बाक़ी रहनेवाली है कि तुम्हारे लिए वही कुछ है जो तुम फ़ैसला करो","उनसे पूछो, \"उनमें से कौन इसकी ज़मानत लेता है","या उनके ठहराए हुए कुछ साझीदार है? फिर तो यह चाहिए कि वे अपने साझीदारों को ले आएँ, यदि वे सच्चे है","जिस दिन पिंडली खुल जाएगी और वे सजदे के लिए बुलाए जाएँगे, तो वे (सजदा) न कर सकेंगे","उनकी निगाहें झुकी हुई होंगी, ज़िल्लत (अपमान) उनपर छा रही होगी। उन्हें उस समय भी सजदा करने के लिए बुलाया जाता था जब वे भले-चंगे थे","अतः तुम मुझे छोड़ दो और उसको जो इस वाणी को झुठलाता है। हम ऐसों को क्रमशः (विनाश की ओर) ले जाएँगे, ऐसे तरीक़े से कि वे नहीं जानते","मैं उन्हें ढील दे रहा हूँ। निश्चय ही मेरी चाल बड़ी मज़बूत है","(क्या वे यातना ही चाहते हैं) या तुम उनसे कोई बदला माँग रहे हो कि वे तावान के बोझ से दबे जाते हों","या उनके पास परोक्ष का ज्ञान है तो वे लिख रहे हैं","तो अपने रब के आदेश हेतु धैर्य से काम लो और मछलीवाले (यूनुस अलै॰) की तरह न हो जाना, जबकि उसने पुकारा था इस दशा में कि वह ग़म में घुट रहा था।","यदि उसके रब की अनुकम्पा उसके साथ न हो जाती तो वह अवश्य ही चटियल मैदान में बुरे हाल में डाल दिया जाता।","अन्ततः उसके रब ने उसे चुन लिया और उसे अच्छे लोगों में सम्मिलित कर दिया","जब वे लोग, जिन्होंने इनकार किया, ज़िक्र (क़ुरआन) सुनते है और कहते है, \"वह तो दीवाना है!\" तो ऐसा लगता है कि वे अपनी निगाहों के ज़ोर से तुम्हें फिसला देंगे","हालाँकि वह सारे संसार के लिए एक अनुस्मृति है"],"n":"अल-क़लम"},{"i":69,"v":["होकर रहनेवाली","क्या है वह होकर रहनेवाली","और तुम क्या जानो कि क्या है वह होकर रहनेवाली","समूद और आद ने उस खड़खड़ा देनेवाली (घटना) को झुठलाया","फिर समूद तो एक हद से बढ़ जानेवाली आपदा से विनष्ट किए गए","और रहे आद, तो वे एक अनियंत्रित प्रचंड वायु से विनष्ट कर दिए गए","अल्लाह ने उसको सात रात और आठ दिन तक उन्मूलन के उद्देश्य से उनपर लगाए रखा। तो लोगों को तुम देखते कि वे उसमें पछाड़े हुए ऐसे पड़े है मानो वे खजूर के जर्जर तने हों","अब क्या तुम्हें उनमें से कोई शेष दिखाई देता है","और फ़िरऔन ने और उससे पहले के लोगों ने और तलपट हो जानेवाली बस्तियों ने यह ख़ता की","उन्होंने अपने रब के रसूल की अवज्ञा की तो उसने उन्हें ऐसी पकड़ में ले लिया जो बड़ी कठोर थी","जब पानी उमड़ आया तो हमने तुम्हें प्रवाहित नौका में सवार किया","ताकि उसे तुम्हारे लिए हम शिक्षाप्रद यादगार बनाएँ और याद रखनेवाले कान उसे सुरक्षित रखें","तो याद रखो जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी","और धरती और पहाड़ों को उठाकर एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा","तो उस दिन घटित होनेवाली घटना घटित हो जाएगी","और आकाश फट जाएगा और उस दिन उसका बन्धन ढीला पड़ जाएगा","और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे और उस दिन तुम्हारे रब के सिंहासन को आठ अपने ऊपर उठाए हुए होंगे","उस दिन तुम लोग पेश किए जाओगे, तुम्हारी कोई छिपी बात छिपी न रहेगी","फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा, \"लो पढ़ो, मेरा कर्म-पत्र","मैं तो समझता ही था कि मुझे अपना हिसाब मिलनेवाला है।","अतः वह सुख और आनन्दमय जीवन में होगा","उच्च जन्नत में","जिसके फलों के गुच्छे झुके होंगे","मज़े से खाओ और पियो उन कर्मों के बदले में जो तुमने बीते दिनों में किए है","और रहा वह क्यक्ति जिसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, वह कहेगा, \"काश, मेरा कर्म-पत्र मुझे न दिया जाता","और मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है","ऐ काश, वह (मृत्यु) समाप्त करनेवाली होती","मेरा माल मेरे कुछ काम न आया","मेरा ज़ोर (सत्ता) मुझसे जाता रहा","पकड़ो उसे और उसकी गरदन में तौक़ डाल दो","फिर उसे भड़कती हुई आग में झोंक दो","फिर उसे एक ऐसी जंजीर में जकड़ दो जिसकी माप सत्तर हाथ है","वह न तो महिमावान अल्लाह पर ईमान रखता था","और न मुहताज को खाना खिलाने पर उभारता था","अतः आज उसका यहाँ कोई घनिष्ट मित्र नहीं","और न ही धोवन के सिवा कोई भोजन है","उसे ख़ताकारों (अपराधियों) के अतिरिक्त कोई नहीं खाता।","अतः कुछ नहीं! मैं क़सम खाता हूँ उन चीज़ों की जो तुम देखते","हो और उन चीज़ों को भी जो तुम नहीं देखते","निश्चय ही वह एक प्रतिष्ठित रसूल की लाई हुई वाणी है","वह किसी कवि की वाणी नहीं। तुम ईमान थोड़े ही लाते हो","और न वह किसी काहिन का वाणी है। तुम होश से थोड़े ही काम लेते हो","अवतरण है सारे संसार के रब की ओर से","यदि वह (नबी) हमपर थोपकर कुछ बातें घड़ता","तो अवश्य हम उसका दाहिना हाथ पकड़ लेते","फिर उसकी गर्दन की रग काट देते","और तुममें से कोई भी इससे रोकनेवाला न होता","और निश्चय ही वह एक अनुस्मृति है डर रखनेवालों के लिए","और निश्चय ही हम जानते है कि तुममें कितने ही ऐसे है जो झुठलाते है","निश्चय ही वह इनकार करनेवालों के लिए सर्वथा पछतावा है","और वह बिल्कुल विश्वसनीय सत्य है।","अतः तुम अपने महिमावान रब के नाम की तसबीह (गुणगान) करो"],"n":"अल-हाक़्क़ा"},{"i":70,"v":["एक माँगनेवाले ने घटित होनेवाली यातना माँगी","जो इनकार करनेवालो के लिए होगी, उसे कोई टालनेवाला नहीं","वह अल्लाह की ओर से होगी, जो चढ़ाव के सोपानों का स्वामी है","फ़रिश्ते और रूह (जिबरील) उसकी ओर चढ़ते है, उस दिन में जिसकी अवधि पचास हज़ार वर्ष है","अतः धैर्य से काम लो, उत्तम धैर्य","वे उसे बहुत दूर देख रहे है","किन्तु हम उसे निकट देख रहे है","जिस दिन आकाश तेल की तलछट जैसा काला हो जाएगा","और पर्वत रंग-बिरंगे ऊन के सदृश हो जाएँगे","कोई मित्र किसी मित्र को न पूछेगा","हालाँकि वे एक-दूसरे को दिखाए जाएँगे। अपराधी चाहेगा कि किसी प्रकार वह उस दिन की यातना से छूटने के लिए अपने बेटों","अपनी पत्नी , अपने भाई","और अपने उस परिवार को जो उसको आश्रय देता है","और उन सभी लोगों को जो धरती में रहते है, फ़िदया (मुक्ति-प्रतिदान) के रूप में दे डाले फिर वह उसको छुटकारा दिला दे","कदापि नहीं! वह लपट मारती हुई आग है","जो मांस और त्वचा को चाट जाएगी","उस व्यक्ति को बुलाती है जिसने पीठ फेरी और मुँह मोड़ा","और (धन) एकत्र किया और सैंत कर रखा","निस्संदेह मनुष्य अधीर पैदा हुआ है","जि उसे तकलीफ़ पहुँचती है तो घबरा उठता है","किन्तु जब उसे सम्पन्नता प्राप्त होती ही तो वह कृपणता दिखाता है","किन्तु नमाज़ अदा करनेवालों की बात और है","जो अपनी नमाज़ पर सदैव जमें रहते है","और जिनके मालों में","माँगनेवालों और वंचित का एक ज्ञात और निश्चित हक़ होता है","जो बदले के दिन को सत्य मानते है","जो अपने रब की यातना से डरते है","उनके रब की यातना है ही ऐसी जिससे निश्चिन्त न रहा जाए","जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते है।","अपनी पत्नि यों या जो उनकी मिल्क में हो उनके अतिरिक्त दूसरों से तो इस बात पर उनकी कोई भर्त्सना नही।","किन्तु जिस किसी ने इसके अतिरिक्त कुछ और चाहा तो ऐसे ही लोग सीमा का उल्लंघन करनेवाले है।","जो अपने पास रखी गई अमानतों और अपनी प्रतिज्ञा का निर्वाह करते है","जो अपनी गवाहियों पर क़़ायम रहते है","और जो अपनी नमाज़ की रक्षा करते है","वही लोग जन्नतों में सम्मानपूर्वक रहेंगे","फिर उन इनकार करनेवालो को क्या हुआ है कि वे तुम्हारी ओर दौड़े चले आ रहे है","दाएँ और बाएँ से गिरोह के गिरोह","क्या उनमें से प्रत्येक व्यक्ति इसकी लालसा रखता है कि वह अनुकम्पा से परिपूर्ण जन्नत में प्रविष्ट हो","कदापि नहीं, हमने उन्हें उस चीज़ से पैदा किया है, जिसे वे भली-भाँति जानते है","अतः कुछ नहीं, मैं क़सम खाता हूँ पूर्वों और पश्चिमों के रब की, हमे इसकी सामर्थ्य प्राप्त है","कि उनकी उनसे अच्छे ले आएँ और हम पिछड़ जानेवाले नहीं है","अतः उन्हें छोड़ो कि वे व्यर्थ बातों में पड़े रहें और खेलते रहे, यहाँ तक कि वे अपने उस दिन से मिलें, जिसका उनसे वादा किया जा रहा है","जिस दिन वे क़ब्रों से तेज़ी के साथ निकलेंगे जैसे किसी निशान की ओर दौड़े जा रहे है","उनकी निगाहें झुकी होंगी, ज़िल्लत उनपर छा रही होगी। यह है वह दिन जिससे वह डराए जाते रहे है"],"n":"अल-मा'रिज़"},{"i":71,"v":["हमने नूह को उसकी कौ़म की ओर भेजा कि \"अपनी क़ौम के लोगों को सावधान कर दो, इससे पहले कि उनपर कोई दुखद यातना आ जाए।","उसने कहा, \"ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मैं तुम्हारे लिए एक स्पष्ट सचेतकर्ता हूँ","कि अल्लाह की बन्दगी करो और उसका डर रखो और मेरी आज्ञा मानो।","वह तुम्हें क्षमा करके तुम्हारे गुनाहों से तुम्हें पाक कर देगा और एक निश्चित समय तक तुम्हे मुहल्लत देगा। निश्चय ही जब अल्लाह का निश्चित समय आ जाता है तो वह टलता नहीं, काश कि तुम जानते","उसने कहा, \"ऐ मेरे रब! मैंने अपनी क़ौम के लोगों को रात और दिन बुलाया","किन्तु मेरी पुकार ने उनके पलायन को ही बढ़ाया","और जब भी मैंने उन्हें बुलाया, ताकि तू उन्हें क्षमा कर दे, तो उन्होंने अपने कानों में अपनी उँगलियाँ दे लीं और अपने कपड़ो से स्वयं को ढाँक लिया और अपनी हठ पर अड़ गए और बड़ा ही घमंड किया","फिर मैंने उन्हें खुल्लमखुल्ला बुलाया","फिर मैंने उनसे खुले तौर पर भी बातें की और उनसे चुपके-चुपके भी बातें की","और मैंने कहा, अपने रब से क्षमा की प्रार्थना करो। निश्चय ही वह बड़ा क्षमाशील है","वह बादल भेजेगा तुमपर ख़ूब बरसनेवाला","और वह माल और बेटों से तुम्हें बढ़ोतरी प्रदान करेगा, और तुम्हारे लिए बाग़ पैदा करेगा और तुम्हारे लिए नहरें प्रवाहित करेगा","तुम्हें क्या हो गया है कि तुम (अपने दिलों में) अल्लाह के लिए किसी गौरव की आशा नहीं रखते","हालाँकि उसने तुम्हें विभिन्न अवस्थाओं से गुज़ारते हुए पैदा किया","क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने किस प्रकार ऊपर तले सात आकाश बनाए","और उनमें चन्द्रमा को प्रकाश और सूर्य का प्रदीप बनाया","और अल्लाह ने तुम्हें धरती से विशिष्ट प्रकार से विकसित किया","फिर वह तुम्हें उसमें लौटाता है और तुम्हें बाहर निकालेगा भी","और अल्लाह ने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया","ताकि तुम उसके विस्तृत मार्गों पर चलो।","नूह ने कहा, \"ऐ मेरे रब! उन्होंने मेरी अवज्ञा की, और उसका अनुसरण किया जिसके धन और जिसकी सन्तान ने उसके घाटे ही मे अभिवृद्धि की","और वे बहुत बड़ी चाल चले","और उन्होंने कहा, अपने इष्ट-पूज्यों के कदापि न छोड़ो और न वह वद्द को छोड़ो और न सुवा को और न यग़ूस और न यऊक़ और नस्र को","और उन्होंने बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट॥ किया है (तो तू उन्हें मार्ग न दिया) अब, तू भी ज़ालिमों की पथभ्रष्टता ही में अभिवृद्धि कर।","वे अपनी बड़ी ख़ताओं के कारण पानी में डूबो दिए गए, फिर आग में दाख़िल कर दिए गए, फिर वे अपने और अल्लाह के बीच आड़ बननेवाले सहायक न पा सके","और नूह ने कहा, \"ऐ मेरे रब! धरती पर इनकार करनेवालों में से किसी बसनेवाले को न छोड","यदि तू उन्हें छोड़ देगा तो वे तेरे बन्दों को पथभ्रष्ट कर देंगे और वे दुराचारियों और बड़े अधर्मियों को ही जन्म देंगे","ऐ मेरे रब! मुझे क्षमा कर दे और मेरे माँ-बाप को भी और हर उस व्यक्ति को भी जो मेरे घर में ईमानवाला बन कर दाख़िल हुआ और (सामान्य) ईमानवाले पुरुषों और ईमानवाली स्त्रियों को भी (क्षमा कर दे), और ज़ालिमों के विनाश को ही बढ़ा।"],"n":"नूह"},{"i":72,"v":["कह दो, \"मेरी ओर प्रकाशना की गई है कि जिन्नों के एक गिरोह ने सुना, फिर उन्होंने कहा कि हमने एक मनभाता क़ुरआन सुना","जो भलाई और सूझ-बूझ का मार्ग दिखाता है, अतः हम उसपर ईमान ले आए, और अब हम कदापि किसी को अपने रब का साझी नहीं ठहराएँगे","और यह कि हमारे रब का गौरब अत्यन्त उच्च है। उसने अपने लिए न तो कोई पत्नी बनाई और न सन्तान","और यह कि हममें का मूर्ख व्यक्ति अल्लाह के विषय में सत्य से बिल्कुल हटी हुई बातें कहता रहा है","और यह कि हमने समझ रखा था कि मनुष्य और जिन्न अल्लाह के विषय में कभी झूठ नहीं बोलते","और यह कि मनुष्यों में से कितने ही पुरुष ऐसे थे, जो जिन्नों में से कितने ही पुरूषों की शरण माँगा करते थे। इसप्रकार उन्होंने उन्हें (जिन्नों को) और चढ़ा दिया","और यह कि उन्होंने गुमान किया जैसे कि तुमने गुमान किया कि अल्लाह किसी (नबी) को कदापि न उठाएगा","और यह कि हमने आकाश को टटोला तो उसे सख़्त पहरेदारों और उल्काओं से भरा हुआ पाया","और यह कि हम उसमें बैठने के स्थानों में सुनने के लिए बैठा करते थे, किन्तु अब कोई सुनना चाहे तो वह अपने लिए घात में लगा एक उल्का पाएगा","और यह कि हम नहीं जानते कि उन लोगों के साथ जो धरती में है बुराई का इरादा किया गया है या उनके रब ने उनके लिए भलाई और मार्गदर्शन का इरादा किय है","और यह कि हममें से कुछ लोग अच्छे है और कुछ लोग उससे निम्नतर है, हम विभिन्न मार्गों पर है","और यह कि हमने समझ लिया कि हम न धरती में कही जाकर अल्लाह के क़ाबू से निकल सकते है, और न आकाश में कहीं भागकर उसके क़ाबू से निकल सकते है","और यह कि जब हमने मार्गदर्शन की बात सुनी तो उसपर ईमान ले आए। अब तो कोई अपने रब पर ईमान लाएगा, उसे न तो किसी हक़ के मारे जाने का भय होगा और न किसी ज़ुल्म-ज़्यादती का","और यह कि हममें से कुछ मुस्लिम (आज्ञाकारी) है और हममें से कुछ हक़ से हटे हुए है। तो जिन्होंने आज्ञापालन का मार्ग ग्रहण कर लिया उन्होंने भलाई और सूझ-बूझ की राह ढूँढ़ ली","रहे वे लोग जो हक़ से हटे हुए है, तो वे जहन्नम का ईधन होकर रहे।","और वह प्रकाशना की गई है कि यदि वे सीधे मार्ग पर धैर्यपूर्वक चलते तो हम उन्हें पर्याप्त जल से अभिषिक्त करते","ताकि हम उसमें उनकी परीक्षा करें। और जो कोई अपने रब की याद से कतराएगा, तो वह उसे कठोर यातना में डाल देगा","और यह कि मस्जिदें अल्लाह के लिए है। अतः अल्लाह के साथ किसी और को न पुकारो","और यह कि \"जब अल्लाह का बन्दा उसे पुकारता हुआ खड़ा हुआ तो वे ऐसे लगते है कि उसपर जत्थे बनकर टूट पड़ेगे।","कह दो, \"मैं तो बस अपने रब ही को पुकारता हूँ, और उसके साथ किसी को साझी नहीं ठहराता।","कह दो, \"मैं तो तुम्हारे लिए न किसी हानि का अधिकार रखता हूँ और न किसी भलाई का।","कहो, \"अल्लाह के मुक़ाबले में मुझे कोई पनाह नहीं दे सकता और न मैं उससे बचकर कतराने की कोई जगह पा सकता हूँ।","सिवाय अल्लाह की ओर से पहुँचने और उसके संदेश देने के। और जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की अवज्ञा करेगा तो उसके लिए जहन्नम की आग है, जिसमें ऐसे लोग सदैव रहेंगे।","यहाँ तक कि जब वे उस चीज़ को देख लेंगे जिसका उनसे वादा किया जाता है तो वे जान लेंगे कि कौन अपने सहायक की दृष्टि से कमज़ोर और संख्या में न्यूतर है","कह दो, \"मैं नहीं जानता कि जिस चीज़ का तुमसे वादा किया जाता है वह निकट है या मेरा रब उसके लिए लम्बी अवधि ठहराता है","परोक्ष का जाननेवाला वही है और वह अपने परोक्ष को किसी पर प्रकट नहीं करता","सिवाय उस व्यक्ति के जिसे उसने रसूल की हैसियत से पसन्द कर लिया हो तो उसके आगे से और उसके पीछे से निगरानी की पूर्ण व्यवस्था कर देता है","ताकि वह यक़ीनी बना दे कि उन्होंने अपने रब के सन्देश पहुँचा दिए और जो कुछ उनके पास है उसे वह घेरे हुए है और हर चीज़ को उसने गिन रखा है।"],"n":"अल-जिन्न"},{"i":73,"v":["ऐ कपड़े में लिपटनेवाले","रात को उठकर (नमाज़ में) खड़े रहा करो - सिवाय थोड़ा हिस्सा","आधी रात","या उससे कुछ थोड़ा कम कर लो या उससे कुछ अधिक बढ़ा लो और क़ुरआन को भली-भाँति ठहर-ठहरकर पढ़ो।","निश्चय ही हम तुमपर एक भारी बात डालनेवाले है","निस्संदेह रात का उठना अत्यन्त अनुकूलता रखता है और बात भी उसमें अत्यन्त सधी हुई होती है","निश्चय ही तुम्हार लिए दिन में भी (तसबीह की) बड़ी गुंजाइश है।","और अपने रब के नाम का ज़िक्र किया करो और सबसे कटकर उसी के हो रहो।","वह पूर्व और पश्चिम का रब है, उसके सिवा कोई इष्ट-पूज्य नहीं, अतः तुम उसी को अपना कार्यसाधक बना लो","और जो कुछ वे कहते है उसपर धैर्य से काम लो और भली रीति से उनसे अलग हो जाओ","और तुम मुझे और झूठलानेवाले सुख-सम्पन्न लोगों को छोड़ दो और उन्हें थोड़ी मुहलत दो","निश्चय ही हमारे पास बेड़ियाँ है और भड़कती हुई आग","और गले में अटकनेवाला भोजन है और दुखद यातना","जिस दिन धरती और पहाड़ काँप उठेंगे, और पहाड़ रेत के ऐसे ढेर होकर रह जाएगे जो बिखरे जा रहे होंगे","निश्चय ही हुमने तुम्हारी ओर एक रसूल तुमपर गवाह बनाकर भेजा है, जिस प्रकार हमने फ़़िरऔन की ओर एक रसूल भेजा था","किन्तु फ़िरऔन ने रसूल की अवज्ञा कि, तो हमने उसे पकड़ लिया और यह पकड़ सख़्त वबाल थी","यदि तुमने इनकार किया तो उस दिन से कैसे बचोगे जो बच्चों को बूढा कर देगा","आकाश उसके कारण फटा पड़ रहा है, उसका वादा तो पूरा ही होना है","निश्चय ही यह एक अनुस्मृति है। अब जो चाहे अपने रब की ओर मार्ग ग्रहण कर ले","निस्संदेह तुम्हारा रब जानता है कि तुम लगभग दो तिहाई रात, आधी रात और एक तिहाई रात तक (नमाज़ में) खड़े रहते हो, और एक गिरोंह उन लोगों में से भी जो तुम्हारे साथ है, खड़ा होता है। और अल्लाह रात और दिन की घट-बढ़ नियत करता है। उसे मालूम है कि तुम सब उसका निर्वाह न कर सकोगे, अतः उसने तुमपर दया-दृष्टि की। अब जितना क़ुरआन आसानी से हो सके पढ़ लिया करो। उसे मालूम है कि तुममे से कुछ बीमार भी होंगे, और कुछ दूसरे लोग अल्लाह के उदार अनुग्रह (रोज़ी) को ढूँढ़ते हुए धरती में यात्रा करेंगे, कुछ दूसरे लोग अल्लाह के मार्ग में युद्ध करेंगे। अतः उसमें से जितना आसानी से हो सके पढ़ लिया करो, और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात देते रहो, और अल्लाह को ऋण दो, अच्छा ऋण। तुम जो भलाई भी अपने लिए (आगे) भेजोगे उसे अल्लाह के यहाँ अत्युत्तम और प्रतिदान की दृष्टि से बहुत बढ़कर पाओगे। और अल्लाह से माफ़ी माँगते रहो। बेशक अल्लाह अत्यन्त क्षमाशील, दयावान है"],"n":"अल-मुज़्जम्मिल"},{"i":74,"v":["ऐ ओढ़ने लपेटनेवाले","उठो, और सावधान करने में लग जाओ","और अपने रब की बड़ाई ही करो","अपने दामन को पाक रखो","और गन्दगी से दूर ही रहो","अपनी कोशिशों को अधिक समझकर उसके क्रम को भंग न करो","और अपने रब के लिए धैर्य ही से काम लो","जब सूर में फूँक मारी जाएगी","तो जिस दिन ऐसा होगा, वह दिन बड़ा ही कठोर होगा","इनकार करनेवालो पर आसान न होगा","छोड़ दो मुझे और उसको जिसे मैंने अकेला पैदा किया","और उसे माल दिया दूर तक फैला हुआ","और उसके पास उपस्थित रहनेवाले बेटे दिए","और मैंने उसके लिए अच्छी तरह जीवन-मार्ग समतल किया","फिर वह लोभ रखता है कि मैं उसके लिए और अधिक दूँगा","कदापि नहीं, वह हमारी आयतों का दुश्मन है","शीघ्र ही मैं उसे घेरकर कठिन चढ़ाई चढ़वाऊँगा","उसने सोचा और अटकल से एक बात बनाई","तो विनष्ट हो, कैसी बात बनाई","फिर विनष्ट हो, कैसी बात बनाई","फिर नज़र दौड़ाई","फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बनाया","फिर पीठ फेरी और घमंड किया","अन्ततः बोला, \"यह तो बस एक जादू है, जो पहले से चला आ रहा है","यह तो मात्र मनुष्य की वाणी है।","मैं शीघ्र ही उसे 'सक़र' (जहन्नम की आग) में झोंक दूँगा","और तुम्हें क्या पता की सक़र क्या है","वह न तरस खाएगी और न छोड़ेगी","खाल को झुलसा देनेवाली है","उसपर उन्नीस (कार्यकर्ता) नियुक्त है","और हमने उस आग पर नियुक्त रहनेवालों को फ़रिश्ते ही बनाया है, और हमने उनकी संख्या को इनकार करनेवालों के लिए मुसीबत और आज़माइश ही बनाकर रखा है। ताकि वे लोग जिन्हें किताब प्रदान की गई थी पूर्ण विश्वास प्राप्त करें, और वे लोग जो ईमान ले आए वे ईमान में और आगे बढ़ जाएँ। और जिन लोगों को किताब प्रदान की गई वे और ईमानवाले किसी संशय मे न पड़े, और ताकि जिनके दिलों मे रोग है वे और इनकार करनेवाले कहें, \"इस वर्णन से अल्लाह का क्या अभिप्राय है?\" इस प्रकार अल्लाह जिसे चाहता है पथभ्रष्ट कर देता है और जिसे चाहता हैं संमार्ग प्रदान करता है। और तुम्हारे रब की सेनाओं को स्वयं उसके सिवा कोई नहीं जानता, और यह तो मनुष्य के लिए मात्र एक शिक्षा-सामग्री है","कुछ नहीं, साक्षी है चाँद","और साक्षी है रात जबकि वह पीठ फेर चुकी","और प्रातःकाल जबकि वह पूर्णरूपेण प्रकाशित हो जाए।","निश्चय ही वह भारी (भयंकर) चीज़ों में से एक है","मनुष्यों के लिए सावधानकर्ता के रूप में","तुममें से उस व्यक्ति के लिए जो आगे बढ़ना या पीछे हटना चाहे","प्रत्येक व्यक्ति जो कुछ उसने कमाया उसके बदले रेहन (गिरवी) है","सिवाय दाएँवालों के","वे बाग़ों में होंगे, पूछ-ताछ कर रहे होंगे","अपराधियों के विषय में","तुम्हे क्या चीज़ सकंर (जहन्नम) में ले आई","वे कहेंगे, \"हम नमाज़ अदा करनेवालों में से न थे।","और न हम मुहताज को खाना खिलाते थे","और व्यर्थ बात और कठ-हुज्जती में पड़े रहनेवालों के साथ हम भी उसी में लगे रहते थे।","और हम बदला दिए जाने के दिन को झुठलाते थे","यहाँ तक कि विश्वसनीय चीज़ (प्रलय-दिवस) में हमें आ लिया।","अतः सिफ़ारिश करनेवालों को कोई सिफ़ारिश उनको कुछ लाभ न पहुँचा सकेगी","आख़िर उन्हें क्या हुआ है कि वे नसीहत से कतराते है","मानो वे बिदके हुए जंगली गधे है","जो शेर से (डरकर) भागे है","नहीं, बल्कि उनमें से प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसे खुली किताबें दी जाएँ","कदापि नहीं, बल्कि ले आख़िरत से डरते नहीं","कुछ नहीं, वह तो एक अनुस्मति है","अब जो कोई चाहे इससे नसीहत हासिल करे","और वे नसीहत हासिल नहीं करेंगे। यह और बात है कि अल्लाह ही ऐसा चाहे। वही इस योग्य है कि उसका डर रखा जाए और इस योग्य भी कि क्षमा करे"],"n":"अल-मुद्धस्सिर"},{"i":75,"v":["नहीं, मैं क़सम खाता हूँ क़ियामत के दिन की","और नहीं! मैं कसम खाता हूँ मलामत करनेवाली आत्मा की","क्या मनुष्य यह समझता है कि हम कदापि उसकी हड्डियों को एकत्र न करेंगे","क्यों नहीं, हम उसकी पोरों को ठीक-ठाक करने की सामर्थ्य रखते है","बल्कि मनुष्य चाहता है कि अपने आगे ढिठाई करता रहे","पूछता है, \"आख़िर क़ियामत का दिन कब आएगा","तो जब निगाह चौंधिया जाएगी","और चन्द्रमा को ग्रहण लग जाएगा","और सूर्य और चन्द्रमा इकट्ठे कर दिए जाएँगे","उस दिन मनुष्य कहेगा, \"कहाँ जाऊँ भागकर","कुछ नहीं, कोई शरण-स्थल नहीं","उस दिन तुम्हारे रब ही ओर जाकर ठहरना है","उस दिन मनुष्य को बता दिया जाएगा जो कुछ उसने आगे बढाया और पीछे टाला","नहीं, बल्कि मनुष्य स्वयं अपने हाल पर निगाह रखता है","यद्यपि उसने अपने कितने ही बहाने पेश किए हो","तू उसे शीघ्र पाने के लिए उसके प्रति अपनी ज़बान को न चला","हमारे ज़िम्मे है उसे एकत्र करना और उसका पढ़ना","अतः जब हम उसे पढ़े तो उसके पठन का अनुसरण कर","फिर हमारे ज़िम्मे है उसका स्पष्टीकरण करना","कुछ नहीं, बल्कि तुम लोग शीघ्र मिलनेवाली चीज़ (दुनिया) से प्रेम रखते हो","और आख़िरत को छोड़ रहे हो","किनते ही चहरे उस दिन तरो ताज़ा और प्रफुल्लित होंगे","अपने रब की ओर देख रहे होंगे।","और कितने ही चेहरे उस दिन उदास और बिगड़े हुए होंगे","समझ रहे होंगे कि उनके साथ कमर तोड़ देनेवाला मामला किया जाएगा","कुछ नहीं, जब प्राण कंठ को आ लगेंगे","और कहा जाएगा, \"कौन है झाड़-फूँक करनेवाला","और वह समझ लेगा कि वह जुदाई (का समय) है","और पिंडली से पिंडली लिपट जाएगी","तुम्हारे रब की ओर उस दिन प्रस्थान होगा","किन्तु उसने न तो सत्य माना और न नमाज़ अदा की","लेकिन झुठलाया और मुँह मोड़ा","फिर अकड़ता हुआ अपने लोगों की ओर चल दिया","अफ़सोस है तुझपर और अफ़सोस है","फिर अफ़सोस है तुझपर और अफ़सोस है","क्या मनुष्य समझता है कि वह यूँ ही स्वतंत्र छोड़ दिया जाएगा","क्या वह केवल टपकाए हुए वीर्य की एक बूँद न था","फिर वह रक्त की एक फुटकी हुआ, फिर अल्लाह ने उसे रूप दिया और उसके अंग-प्रत्यंग ठीक-ठाक किए","और उसकी दो जातियाँ बनाई - पुरुष और स्त्री","क्या उसे वह सामर्थ्य प्राप्त- नहीं कि वह मुर्दों को जीवित कर दे"],"n":"अल-क़ियामाह"},{"i":76,"v":["क्या मनुष्य पर काल-खंड का ऐसा समय भी बीता है कि वह कोई ऐसी चीज़ न था जिसका उल्लेख किया जाता","हमने मनुष्य को एक मिश्रित वीर्य से पैदा किया, उसे उलटते-पलटते रहे, फिर हमने उसे सुनने और देखनेवाला बना दिया","हमने उसे मार्ग दिखाया, अब चाहे वह कृतज्ञ बने या अकृतज्ञ","हमने इनकार करनेवालों के लिए ज़जीरें और तौक़ और भड़कती हुई आग तैयार कर रखी है","निश्चय ही वफ़ादार लोग ऐसे जाम से पिएँगे जिसमें काफ़ूर का मिश्रण होगा","उस स्रोत का क्या कहना! जिस पर बैठकर अल्लाह के बन्दे पिएँगे, इस तरह कि उसे बहा-बहाकर (जहाँ चाहेंगे) ले जाएँगे","वे नज़र (मन्नत) पूरी करते है और उस दिन से डरते है जिसकी आपदा व्यापक होगी","और वे मुहताज, अनाथ और क़ैदी को खाना उसकी चाहत रखते हुए खिलाते है","हम तो केवल अल्लाह की प्रसन्नता के लिए तुम्हें खिलाते है, तुमसे न कोई बदला चाहते है और न कृतज्ञता ज्ञापन","हमें तो अपने रब की ओर से एक ऐसे दिन का भय है जो त्योरी पर बल डाले हुए अत्यन्त क्रूर होगा।","अतः अल्लाह ने उस दिन की बुराई से बचा लिया और उन्हें ताज़गी और ख़ुशी प्रदान की","और जो उन्होंने धैर्य से काम लिया, उसके बदले में उन्हें जन्नत और रेशमी वस्त्र प्रदान किया","उसमें वे तख़्तों पर टेक लगाए होंगे, वे उसमें न तो सख़्त धूप देखेंगे औ न सख़्त ठंड़","और उस (बाग़) के साए उनपर झुके होंगे और उसके फलों के गुच्छे बिलकुल उनके वश में होंगे","और उनके पास चाँदी के बरतन ग़र्दिश में होंगे और प्याले","जो बिल्कुल शीशे हो रहे होंगे, शीशे भी चाँदी के जो ठीक अन्दाज़े करके रखे गए होंगे","और वहाँ वे एक और जाम़ पिएँगे जिसमें सोंठ का मिश्रण होगा","क्या कहना उस स्रोत का जो उसमें होगा, जिसका नाम सल-सबील है","उनकी सेवा में ऐसे किशोर दौड़ते रहे होंगे जो सदैव किशोर ही रहेंगे। जब तुम उन्हें देखोगे तो समझोगे कि बिखरे हुए मोती है","जब तुम वहाँ देखोगे तो तुम्हें बड़ी नेमत और विशाल राज्य दिखाई देगा","उनके ऊपर हरे बारीक हरे 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है उस दिन झूठलानेवालों की","क्या ऐसा नहीं है कि हमने धरती को समेट रखनेवाली बनाया","ज़िन्दों को भी और मुर्दों को भी","और उसमें ऊँचे-ऊँचे पहाड़ जमाए और तुम्हें मीठा पानी पिलाया","तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की","चलो उस चीज़ की ओर जिसे तुम झुठलाते रहे हो","चलो तीन शाखाओंवाली छाया की ओर","जिसमें न छाँव है और न वह अग्नि-ज्वाला से बचा सकती है","निस्संदेह वे (ज्वालाएँ) महल जैसी (ऊँची) चिंगारियाँ फेंकती है","मानो वे पीले ऊँट हैं","तबाही है उस झुठलानेवालों की","यह वह दिन है कि वे कुछ बोल नहीं रहे है","तो कोई उज़ पेश करें, (बात यह है कि) उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है","तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की","यह फ़ैसले का दिन है, हमने तुम्हें भी और पहलों को भी इकट्ठा कर दिया","अब यदि तुम्हारे पास कोई चाल है तो मेरे विरुद्ध चलो।","तबाही है उस दिन झुठलानेवालो की","निस्संदेह डर रखनेवाले छाँवों और स्रोतों में है","और उन फलों के बीच जो वे चाहे","खाओ-पियो मज़े से, उस कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे हो।","निश्चय ही उत्तमकारों को हम ऐसा ही बदला देते है","तबाही है उस दिन झुठलानेवालों की","खा लो 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क्या तू यह चाहता है कि स्वयं को पाक-साफ़ कर ले","और मैं तेरे रब की ओर तेरा मार्गदर्शन करूँ कि तु (उससे) डरे","फिर उसने (मूसा ने) उसको बड़ी निशानी दिखाई","किन्तु उसने झुठला दिया और कहा न माना","फिर सक्रियता दिखाते हुए पलटा","फिर (लोगों को) एकत्र किया और पुकारकर कहा","मैं तुम्हारा उच्चकोटि का स्वामी हूँ","अन्ततः अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया की शिक्षाप्रद यातना में पकड़ लिया","निस्संदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए बड़ी शिक्षा है जो डरे","क्या तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन कार्य है या आकाश को? अल्लाह ने उसे बनाया","उसकी ऊँचाई को ख़ूब ऊँचा करके उसे ठीक-ठाक किया","और उसकी रात को अन्धकारमय बनाया और उसका दिवस-प्रकाश प्रकट किया","और धरती को देखो! इसके पश्चात उसे फैलाया","उसमें से उसका पानी और उसका चारा निकाला","और पहाड़ो को देखो! उन्हें उस (धरती) में जमा दिया","तुम्हारे लिए और तुम्हारे मवेशियों के लिए जीवन-सामग्री के रूप में","फिर जब वह महाविपदा आएगी","उस दिन मनुष्य जो कुछ भी उसने प्रयास किया होगा उसे याद करेगा","और भड़कती आग (जहन्नम) देखने वालों के लिए खोल दी जाएगी","तो जिस किसी ने सरकशी की","और सांसारिक जीवन को प्राथमिकता दो होगी","तो निस्संदेह भड़कती आग ही उसका ठिकाना है","और रहा वह व्यक्ति जिसने अपने रब के सामने खड़े होने का भय रखा और अपने जी को बुरी इच्छा से रोका","तो जन्नत ही उसका ठिकाना है","वे तुमसे उस घड़ी के विषय में पूछते है कि वह कब आकर ठहरेगी","उसके बयान करने से तुम्हारा क्या सम्बन्ध","उसकी अन्तिम पहुँच तो तेरे से ही सम्बन्ध रखती है","तुम तो बस उस व्यक्ति को सावधान करनेवाले हो जो उससे डरे","जिस दिन वे उसे देखेंगे तो (ऐसा लगेगा) मानो वे (दुनिया में) बस एक शाम या उसकी सुबह ही ठहरे है"],"n":"अन-नाज़िअत"},{"i":80,"v":["उसने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया","इस कारण कि उसके पास अन्धा आ गया।","और तुझे क्या मालूम शायद वह स्वयं को सँवारता-निखारता हो","या नसीहत हासिल करता हो तो नसीहत उसके लिए लाभदायक हो","रहा वह व्यक्ति जो धनी हो गया ह","तू उसके पीछे पड़ा है","हालाँकि वह अपने को न निखारे तो तुझपर कोई ज़िम्मेदारी नहीं आती","और रहा वह व्यक्ति जो स्वयं ही तेरे पास दौड़ता हुआ आया","और वह डरता भी है","तो तू उससे बेपरवाई करता है","कदापि नहीं, वे (आयतें) तो महत्वपूर्ण नसीहत है","तो जो चाहे उसे याद कर ले","पवित्र पन्नों में अंकित है","प्रतिष्ठि्त, उच्च","ऐसे कातिबों के हाथों में रहा करते है","जो प्रतिष्ठित और नेक है","विनष्ट हुआ मनुष्य! कैसा अकृतज्ञ है","उसको किस चीज़ से पैदा किया","तनिक-सी बूँद से उसको पैदा किया, तो उसके लिए एक अंदाजा ठहराया","फिर मार्ग को देखो, उसे सुगम कर दिया","फिर उसे मृत्यु दी और क्रब में उसे रखवाया","फिर जब चाहेगा उसे (जीवित करके) उठा खड़ा करेगा।","कदापि नहीं, उसने उसको पूरा नहीं किया जिसका आदेश अल्लाह ने उसे दिया है","अतः मनुष्य को चाहिए कि अपने भोजन को देखे","कि हमने ख़ूब पानी बरसाया","फिर धरती को विशेष रूप से फाड़ा","फिर हमने उसमें उगाए अनाज","और अंगूर और तरकारी","और ज़ैतून और खजूर","और घने बाग़","और मेवे और घास-चारा","तुम्हारे लिए और तुम्हारे चौपायों के लिेए जीवन-सामग्री के रूप में","फिर जब वह बहरा कर देनेवाली प्रचंड आवाज़ आएगी","जिस दिन आदमी भागेगा अपने भाई से","और अपनी माँ और अपने बाप से","और अपनी पत्नी और अपने बेटों से","उनमें से प्रत्येक व्यक्ति को उस दिन ऐसी पड़ी होगी जो उसे दूसरों से बेपरवाह कर देगी","कितने ही चेहरे उस दिन रौशन होंगे","हँसते, प्रफुल्लित","और कितने ही चेहरे होंगे जिनपर उस दिन धूल पड़ी होगी","उनपर कलौंस छा रही होगी","वहीं होंगे इनकार करनेवाले दुराचारी लोग"],"n":"अबासा"},{"i":81,"v":["जब सूर्य लपेट दिया जाएगा","सारे तारे मैले हो जाएँगे","जब पहाड़ चलाए जाएँगे","जब दस मास की गाभिन ऊँटनियाँ आज़ाद छोड़ दी जाएँगी","जब जंगली जानवर एकत्र किए जाएँगे","जब समुद्र भड़का दिया जाएँगे","जब लोग क़िस्म-क़िस्म कर दिए जाएँगे","और जब जीवित गाड़ी गई लड़की से पूछा जाएगा","कि उसकी हत्या किस गुनाह के कारण की गई","और जब कर्म-पत्र फैला दिए जाएँगे","और जब आकाश की खाल उतार दी जाएगी","जब जहन्नम को दहकाया जाएगा","और जब जन्नत निकट कर दी जाएगी","तो कोई भी क्यक्ति जान लेगा कि उसने क्या उपस्थित किया है","अतः नहीं! मैं क़सम खाता हूँ पीछे हटनेवालों की","चलनेवालों, छिपने-दुबकने-वालों की","साक्षी है रात्रि जब वह प्रस्थान करे","और साक्षी है प्रातः जब वह साँस ले","निश्चय ही वह एक आदरणीय संदेशवाहक की लाई हुई वाणी है","जो शक्तिवाला है, सिंहासनवाले के यहाँ जिसकी पैठ है","उसका आदेश माना जाता है, वहाँ वह विश्वासपात्र है","तुम्हारा साथी कोई दीवाना नहीं","उसने तो (पराकाष्ठान के) प्रत्यक्ष क्षितिज पर होकर उस (फ़रिश्ते) को देखा है","और वह परोक्ष के मामले में कृपण नहीं है","और वह (क़ुरआन) किसी धुतकारे हुए शैतान की लाई हुई वाणी नहीं है","फिर तुम किधर जा रहे हो","वह तो सारे संसार के लिए बस एक अनुस्मृति है","उसके लिए तो तुममे से सीधे मार्ग पर चलना चाहे","और तुम नहीं चाह सकते सिवाय इसके कि सारे जहान का रब अल्लाह चाहे"],"n":"अत-तक्वीर"},{"i":82,"v":["जबकि आकाश फट जाएगा","और जबकि तारे बिखर जाएँगे","और जबकि समुद्र बह पड़ेंगे","और जबकि क़बें उखेड़ दी जाएँगी","तब हर व्यक्ति जान लेगा जिसे उसने प्राथमिकता दी और पीछे डाला","ऐ मनुष्य! किस चीज़ ने तुझे अपने उदार प्रभु के विषय में धोखे में डाल रखा हैं","जिसने तेरा प्रारूप बनाया, फिर नख-शिख से तुझे दुरुस्त किया और तुझे संतुलन प्रदान किया","जिस रूप में चाहा उसने तुझे जोड़कर तैयार किया","कुछ नहीं, बल्कि तुम बदला दिए जाने का झुठलाते हो","जबकि तुमपर निगरानी करनेवाले नियुक्त हैं","प्रतिष्ठित लिपिक","वे जान रहे होते है जो कुछ भी तुम लोग करते हो","निस्संदेह वफ़ादार लोग नेमतों में होंगे","और निश्चय ही दुराचारी भड़कती हुई आग में","जिसमें वे बदले के दिन प्रवेश करेंगे","और उससे वे ओझल नहीं होंगे","और तुम्हें क्या मालूम कि बदले का दिन क्या है","फिर तुम्हें क्या मालूम कि बदले का दिन क्या है","जिस दिन कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के लिए किसी चीज़ का अधिकारी न होगा, मामला उस दिन अल्लाह ही के हाथ में होगा"],"n":"अल-इन्फितार"},{"i":83,"v":["तबाही है घटानेवालों के लिए","जो नापकर लोगों पर नज़र जमाए हुए लेते हैं तो पूरा-पूरा लेते हैं","किन्तु जब उन्हें नापकर या तौलकर देते हैं तो घटाकर देते हैं","क्या वे समझते नहीं कि उन्हें (जीवित होकर) उठना है","एक भारी दिन के लिए","जिस दिन लोग सारे संसार के रब के सामने खड़े होंगे","कुछ नहीं, निश्चय ही दुराचारियों का काग़ज 'सिज्जीन' में है","तुम्हें क्या मालूम कि 'सिज्जीन' क्या हैं","मुहर लगा हुआ काग़ज","तबाही है उस दिन झुठलाने-वालों की","जो बदले के दिन को झुठलाते है","और उसे तो बस प्रत्येक वह क्यक्ति ही झूठलाता है जो सीमा का उल्लंघन करनेवाला, पापी है","जब हमारी आयतें उसे सुनाई जाती है तो कहता है, \"ये तो पहले की कहानियाँ है।","कुछ नहीं, बल्कि जो कुछ वे कमाते रहे है वह उनके दिलों पर चढ़ गया है","कुछ नहीं, अवश्य ही वे उस दिन अपने रब से ओट में होंगे","फिर वे भड़कती आग में जा पड़ेगे","फिर कहा जाएगा, \"यह वही है जिस तुम झुठलाते थे","कुछ नही, निस्संदेह वफ़ादार लोगों का काग़ज़ 'इल्लीयीन' (उच्च श्रेणी के लोगों) में है।","और तुम क्या जानो कि 'इल्लीयीन' क्या है","लिखा हुआ रजिस्टर","जिसे देखने के लिए सामीप्य प्राप्त लोग उपस्थित होंगे","निस्संदेह अच्छे लोग नेमतों में होंगे","ऊँची मसनदों पर से देख रहे होंगे","उनके चहरों से तुम्हें नेमतों की ताज़गी और आभा को बोध हो रहा होगा","उन्हें मुहरबंद विशुद्ध पेय पिलाया जाएगा","मुहर उसकी मुश्क ही होगी - जो लोग दूसरी पर बाज़ी ले जाना चाहते हो वे इस चीज़ को प्राप्त करने में बाज़ी ले जाने का प्रयास करे","और उसमें 'तसनीम' का मिश्रण होगा","हाल यह है कि वह एक स्रोत है, जिसपर बैठकर सामीप्य प्राप्त लोग पिएँगे","जो अपराधी है वे ईमान लानेवालों पर हँसते थे","और जब उनके पास से गुज़रते तो आपस में आँखों और भौंहों से इशारे करते थे","और जब अपने लोगों की ओर पलटते है तो चहकते, इतराते हुए पलटते थे","और जब उन्हें देखते तो कहते, \"ये तो भटके हुए है।","हालाँकि वे उनपर कोई निगरानी करनेवाले बनाकर नहीं भेजे गए थे","तो आज ईमान लानेवाले, इनकार करनेवालों पर हँस रहे हैं","ऊँची मसनदों पर से देख रहे है","क्या मिल गया बदला इनकार करनेवालों को उसका जो कुछ वे करते रहे है"],"n":"अल-मुतफ़फिफीन"},{"i":84,"v":["जबकि आकाश फट जाएगा","और वह अपने रब की सुनेगा, और उसे यही चाहिए भी","जब धरती फैला दी जाएगी","और जो कुछ उसके भीतर है उसे बाहर डालकर खाली हो जाएगी","और वह अपने रब की सुनेगी, और उसे यही चाहिए भी","ऐ मनुष्य! तू मशक़्क़त करता हुआ अपने रब ही की ओर खिंचा चला जा रहा है और अन्ततः उससे मिलने वाला है","फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया","तो उससे आसान, सरसरी हिसाब लिया जाएगा","और वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश पलटेगा","और रह वह व्यक्ति जिसका कर्म-पत्र (उसके बाएँ हाथ में) उसकी पीठ के पीछे से दिया गया","तो वह विनाश (मृत्यु) को पुकारेगा","और दहकती आग में जा पड़ेगा","वह अपने लोगों में मग्न था","उसने यह समझ रखा था कि उसे कभी पलटना नहीं है","क्यों नहीं, निश्चय ही उसका रब तो उसे देख रहा था","अतः कुछ नहीं, मैं क़सम खाता हूँ सांध्य-लालिमा की","और रात की और उसके समेट लेने की","और चन्द्रमा की जबकि वह पूर्ण हो जाता है","निश्चय ही तुम्हें मंजिल पर मंजिल चढ़ना है","फिर उन्हें क्या हो गया है कि ईमान नहीं लाते","और जब उन्हें कुरआन पढ़कर सुनाया जाता है तो सजदे में नहीं गिर पड़ते","नहीं, बल्कि इनकार करनेवाले तो झुठलाते है","हालाँकि जो कुछ वे अपने अन्दर एकत्र कर रहे है, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है","अतः उन्हें दुखद यातना की मंगल सूचना दे दो","अलबत्ता जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए कभी न समाप्त॥ होनेवाला प्रतिदान है"],"n":"अल-इनशिक़ाक़"},{"i":85,"v":["साक्षी है बुर्जोंवाला आकाश","और वह दिन जिसका वादा किया गया है","और देखनेवाला, और जो देखा गया","विनष्ट हों खाईवाले","ईधन भरी आगवाले","जबकि वे वहाँ बैठे होंगे","और वे जो कुछ ईमानवालों के साथ करते रहे, उसे देखेंगे","उन्होंने उन (ईमानवालों) से केवल इस कारण बदला लिया और शत्रुता की कि वे उस अल्लाह पर ईमान रखते थे जो अत्यन्त प्रभुत्वशाली, प्रशंसनीय है","जिसके लिए आकाशों और धरती की बादशाही है। और अल्लाह हर चीज़ का साक्षी है","जिन लोगों ने ईमानवाले पुरुषों और ईमानवाली स्त्रियों को सताया और आज़माईश में डाला, फिर तौबा न की, निश्चय ही उनके लिए जहन्नम की यातना है और उनके लिए जलने की यातना है","निश्चय ही जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए बाग़ है, जिनके नीचे नहरें बह रही होगी। वही है बड़ी सफलता","वास्तव में तुम्हारे रब की पकड़ बड़ी ही सख़्त है","वही आरम्भ करता है और वही पुनरावृत्ति करता है","वह बड़ा क्षमाशील, बहुत प्रेम करनेवाला है","सिंहासन का स्वामी है, बडा गौरवशाली","जो चाहे उसे कर डालनेवाला","क्या तुम्हें उन सेनाओं की भी ख़बर पहुँची हैं","फ़िरऔन और समूद की","नहीं, बल्कि जिन लोगों ने इनकार किया है, वे झुठलाने में लगे हुए है","हालाँकि अल्लाह उन्हें घेरे हुए है, उनके आगे-पीछे से","नहीं, बल्कि वह तो गौरव क़ुरआन है","सुरक्षित पट्टिका में अंकित है"],"n":"अल-बुरूज"},{"i":86,"v":["साक्षी है आकाश, और रात में प्रकट होनेवाला","और तुम क्या जानो कि रात में प्रकट होनेवाला क्या है","दमकता हुआ तारा","कि हर एक व्यक्ति पर एक निगरानी करनेवाला नियुक्त है","अतः मनुष्य को चाहिए कि देखे कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है","एक उछलते पानी से पैदा किया गया है","जो पीठ और पसलियों के मध्य से निकलता है","निश्चय ही वह उसके लौटा देने की सामर्थ्य रखता है","जिस दिन छिपी चीज़ें परखी जाएँगी","तो उस समय उसके पास न तो अपनी कोई शक्ति होगी और न कोई सहायक","साक्षी है आवर्तन (उलट-फेर) वाला आकाश","और फट जानेवाली धरती","वह दो-टूक बात है","वह कोई हँसी-मज़ाक नही है","वे एक चाल चल रहे है","और मैं भी एक चाल चल रहा हूँ","अत मुहलत दे दो उन इनकार करनेवालों को; मुहलत दे दो उन्हें थोड़ी-सी"],"n":"अत-तारीक"},{"i":87,"v":["तसबीह करो, अपने सर्वाच्च रब के नाम की","जिसने पैदा किया, फिर ठीक-ठाक किया","जिसने निर्धारित किया, फिर मार्ग दिखाया","जिसने वनस्पति उगाई","फिर उसे ख़ूब घना और हरा-भरा कर दिया","हम तुम्हें पढ़ा देंगे, फिर तुम भूलोगे नहीं","बात यह है कि अल्लाह की इच्छा ही क्रियान्वित है। निश्चय ही वह जानता है खुले को भी और उसे भी जो छिपा रहे","हम तुम्हें सहज ढंग से उस चीज़ की पात्र बना देंगे जो सहज एवं मृदुल (आरामदायक) है","अतः नसीहत करो, यदि नसीहत लाभप्रद हो","नसीहत हासिल कर लेगा जिसको डर होगा","किन्तु उससे कतराएगा वह अत्यन्त दुर्भाग्यवाला","जो बड़ी आग में पड़ेगा","फिर वह उसमें न मरेगा न जिएगा","सफल हो गया वह जिसने अपने आपको निखार लिया","और अपने रब के नाम का स्मरण किया, अतः नमाज़ अदा की","नहीं, बल्कि तुम तो सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हो","हालाँकि आख़िरत अधिक उत्तम और शेष रहनेवाली है","निस्संदेह यही बात पहले की किताबों में भी है","इबराईम और मूसा की किताबों में"],"n":"अल-आला"},{"i":88,"v":["क्या तुम्हें उस छा जानेवाली की ख़बर पहुँची है","उस दिन कितने ही चेहरे गिरे हुए होंगे","कठिन परिश्रम में पड़े, थके-हारे","दहकती आग में प्रवेश करेंगे","खौलते हुए स्रोत से पिएँगे","उनके लिए कोई खाना न होगा सिवाय एक प्रकार के ज़री के","जो न पुष्ट करे और न भूख मिटाए","उस दिन कितने ही चेहरे प्रफुल्लित और सौम्य होंगे","अपने प्रयास पर प्रसन्न","उच्च जन्नत में","जिसमें कोई व्यर्थ बात न सुनेंगे","उसमें स्रोत प्रवाहित होगा","उसमें ऊँची-ऊँची मसनदें होगी","प्याले ढंग से रखे होंगे","क्रम से गाव तकिए लगे होंगे","और हर ओर क़ालीने बिछी होंगी","फिर क्या वे ऊँट की ओर नहीं देखते कि कैसा बनाया गया","और आकाश की ओर कि कैसा ऊँचा किया गया","और पहाड़ो की ओर कि कैसे खड़े किए गए","और धरती की ओर कि कैसी बिछाई गई","अच्छा तो नसीहत करो! तुम तो बस एक नसीहत करनेवाले हो","तुम उनपर कोई दरोग़ा नही हो","किन्तु जिस किसी ने मुँह फेरा और इनकार किया","तो अल्लाह उसे बड़ी यातना देगा","निस्संदेह हमारी ओर ही है उनका लौटना","फिर हमारे ही ज़िम्मे है उनका हिसाब लेना"],"n":"अल-ग़ाशियाह"},{"i":89,"v":["साक्षी है उषाकाल","साक्षी है दस रातें","साक्षी है युग्म और अयुग्म","साक्षी है रात जब वह विदा हो रही हो","क्या इसमें बुद्धिमान के लिए बड़ी गवाही है","क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे रब ने क्या किया आद के साथ","स्तम्भों वाले 'इरम' के साथ","वे ऐसे थे जिनके सदृश बस्तियों में पैदा नहीं हुए","और समूद के साथ, जिन्होंने घाटी में चट्टाने तराशी थी","और मेखोवाले फ़िरऔन के साथ","वे लोग कि जिन्होंने देशो में सरकशी की","और उनमें बहुत बिगाड़ पैदा किया","अततः तुम्हारे रब ने उनपर यातना का कोड़ा बरसा दिया","निस्संदेह तुम्हारा रब घात में रहता है","किन्तु मनुष्य का हाल यह है कि जब उसका रब इस प्रकार उसकी परीक्षा करता है कि उसे प्रतिष्ठा और नेमत प्रदान करता है, तो वह कहता है, \"मेरे रब ने मुझे प्रतिष्ठित किया।","किन्तु जब कभी वह उसकी परीक्षा इस प्रकार करता है कि उसकी रोज़ी नपी-तुली कर देता है, तो वह कहता है, \"मेरे रब ने मेरा अपमान किया।","कदापि नहीं, बल्कि तुम अनाथ का सम्मान नहीं करते","और न मुहताज को खिलान पर एक-दूसरे को उभारते हो","और सारी मीरास समेटकर खा जाते हो","और धन से उत्कट प्रेम रखते हो","कुछ नहीं, जब धरती कूट-कूटकर चुर्ण-विचुर्ण कर दी जाएगी","और तुम्हारा रब और फ़रिश्ता (बन्दों की) एक-एक पंक्ति के पास आएगा","और जहन्नम को उस दिन लाया जाएगा, उस दिन मनुष्य चेतेगा, किन्तु कहाँ है उसके लिए लाभप्रद उस समय का चेतना","वह कहेगा, \"ऐ काश! मैंने अपने जीवन के लिए कुछ करके आगे भेजा होता।","फिर उस दिन कोई नहीं जो उसकी जैसी यातना दे","और कोई नहीं जो उसकी जकड़बन्द की तरह बाँधे","ऐ संतुष्ट आत्मा","लौट अपने रब की ओर, इस तरह कि तू उससे राज़ी है वह तुझसे राज़ी है। अतः मेरे बन्दों में सम्मिलित हो जा।","अतः मेरे बन्दों में सम्मिलित हो जा","और प्रवेश कर मेरी जन्नत में।"],"n":"अल-फ़ज्र"},{"i":90,"v":["सुनो! मैं क़सम खाता हूँ इस नगर (मक्का) की","हाल यह है कि तुम इसी नगर में रह रहे हो","और बाप और उसकी सन्तान की","निस्संदेह हमने मनुष्य को पूर्ण मशक़्क़त (अनुकूलता और सन्तुलन) के साथ पैदा किया","क्या वह समझता है कि उसपर किसी का बस न चलेगा","कहता है कि \"मैंने ढेरो माल उड़ा दिया।","क्या वह समझता है कि किसी ने उसे देखा नहीं","क्या हमने उसे नहीं दी दो आँखें","और एक ज़बान और दो होंठ","और क्या ऐसा नहीं है कि हमने दिखाई उसे दो ऊँचाइयाँ","किन्तु वह तो हुमककर घाटी में से गुजंरा ही नहीं और (न उसने मुक्ति का मार्ग पाया)","और तुम्हें क्या मालूम कि वह घाटी क्या है","किसी गरदन का छुड़ाना","या भूख के दिन खाना खिलाना","किसी निकटवर्ती अनाथ को","या धूल-धूसरित मुहताज को","फिर यह कि वह उन लोगों में से हो जो ईमान लाए और जिन्होंने एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की , और एक-दूसरे को दया की ताकीद की","वही लोग है सौभाग्यशाली","रहे वे लोग जिन्होंने हमारी आयातों का इनकार किया, वे दुर्भाग्यशाली लोग है","उनपर आग होगी, जिसे बन्द कर दिया गया होगा"],"n":"अल-बलद"},{"i":91,"v":["साक्षी है सूर्य और उसकी प्रभा","और चन्द्रमा जबकि वह उनके पीछे आए","और दिन, जबकि वह उसे प्रकट कर दे","और रात, जबकि वह उसको ढाँक ले","और आकाश और जैसा कुछ उसे उठाया","और धरती और जैसा कुछ उसे बिछाया","और आत्मा और जैसा कुछ उसे सँवारा","फिर उसके दिल में डाली उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी","सफल हो गया जिसने उसे विकसित किया","और असफल हुआ जिसने उसे दबा दिया","समूद ने अपनी सरकशी से झुठलाया","जब उनमें का सबसे बड़ा दुर्भाग्यशाली उठ खड़ा हुआ","तो अल्लाह के रसूल ने उनसे कहा, \"सावधान, अल्लाह की ऊँटनी और उसके पिलाने (की बारी) से।","किन्तु उन्होंने उसे झुठलाया और उस ऊँटनी की कूचें काट डाली। अन्ततः उनके रब ने उनके गुनाह के कारण उनपर तबाही डाल दी और उन्हें बराबर कर दिया","और उसे उसके परिणाम का कोई भय नहीं"],"n":"अश-शम्स"},{"i":92,"v":["साक्षी है रात जबकि वह छा जाए","और दिन जबकि वह प्रकाशमान हो","और नर और मादा का पैदा करना","कि तुम्हारा प्रयास भिन्न-भिन्न है","तो जिस किसी ने दिया और डर रखा","और अच्छी चीज़ की पुष्टि की","हम उस सहज ढंग से उस चीज का पात्र बना देंगे, जो सहज और मृदुल (सुख-साध्य) है","रहा वह व्यक्ति जिसने कंजूसी की और बेपरवाही बरती","और अच्छी चीज़ को झुठला दिया","हम उसे सहज ढंग से उस चीज़ का पात्र बना देंगे, जो कठिन 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पैदा किया","पैदा किया मनुष्य को जमे हुए ख़ून के एक लोथड़े से","पढ़ो, हाल यह है कि तुम्हारा रब बड़ा ही उदार है","जिसने क़लम के द्वारा शिक्षा दी","मनुष्य को वह ज्ञान प्रदान किया जिस वह न जानता था","कदापि नहीं, मनुष्य सरकशी करता है","इसलिए कि वह अपने आपको आत्मनिर्भर देखता है","निश्चय ही तुम्हारे रब ही की ओर पलटना है","क्या तुमने देखा उस व्यक्ति को","जो एक बन्दे को रोकता है, जब वह नमाज़ अदा करता है","तुम्हारा क्या विचार है? यदि वह सीधे मार्ग पर हो","या परहेज़गारी का हुक्म दे (उसके अच्छा होने में क्या संदेह है)","तुम्हारा क्या विचार है? यदि उस (रोकनेवाले) ने झुठलाया और मुँह मोड़ा (तो उसके बुरा होने में क्या संदेह है)","क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है","कदापि नहीं, यदि वह बाज़ न आया तो हम चोटी पकड़कर घसीटेंगे","झूठी, ख़ताकार चोटी","अब बुला ले वह अपनी मजलिस को","हम भी बुलाए लेते है सिपाहियों को","कदापि नहीं, उसकी बात न मानो और सजदे करते और क़रीब होते रहो"],"n":"अल-अलक़"},{"i":97,"v":["हमने इसे क़द्र की रात में अवतरित किया","और तुम्हें क्या मालूम कि क़द्र की रात क्या है","क़द्र की रात उत्तम है हज़ार महीनों से","उसमें फ़रिश्तें और रूह हर महत्वपूर्ण मामलें में अपने रब की अनुमति से उतरते है","वह रात पूर्णतः शान्ति और सलामती है, उषाकाल के उदय होने तक"],"n":"अल-क़दर"},{"i":98,"v":["किताबवालों और मुशरिकों (बहुदेववादियों) में से जिन लोगों ने इनकार किया वे कुफ़्र (इनकार) से अलग होनेवाले नहीं जब तक कि उनके पास स्पष्ट प्रमाण न आ जाए","अल्लाह की ओर से एक रसूल पवित्र पृष्ठों को पढ़ता हुआ","जिनमें ठोस और ठीक आदेश अंकित हों","हालाँकि जिन्हें किताब दी गई थी। वे इसके पश्चात फूट में पड़े कि उनके पास स्पष्ट प्रमाण आ चुका था","और उन्हें आदेश भी बस यही दिया गया था कि वे अल्लाह की बन्दगी करे निष्ठा एवं विनयशीलता को उसके लिए विशिष्ट करके, बिलकुल एकाग्र होकर, और नमाज़ की पाबन्दी करें और ज़कात दे। और यही है सत्यवादी समुदाय का धर्म","निस्संदेह किताबवालों और मुशरिकों (बहुदेववादियों) में से जिन लोगों ने इनकार किया है, वे जहन्नम की आग में पड़ेगे; उसमें सदैव रहने के लिए। वही पैदा किए गए प्राणियों में सबसे बुरे है","किन्तु निश्चय ही वे लोग, जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए पैदा किए गए प्राणियों में सबसे अच्छे है","उनका बदला उनके अपने रब के पास सदाबहार बाग़ है, जिनके नीचे नहरें बह रही होंगी। उनमें वे सदैव रहेंगे। अल्लाह उनसे राज़ी हुआ और वे उससे राज़ी हुए। यह कुछ उसके लिए है, जो अपने रब से डरा"],"n":"अल-बैयिनाह"},{"i":99,"v":["जब धरती इस प्रकार हिला डाली जाएगी जैसा उसे हिलाया जाना है","और धरती अपने बोझ बाहर निकाल देगी","और मनुष्य कहेगा, \"उसे क्या हो गया है","उस दिन वह अपना वृत्तांत सुनाएगी","इस कारण कि तुम्हारे रब ने उसे यही संकेत किया होगा","उस दिन लोग अलग-अलग निकलेंगे, ताकि उन्हें कर्म दिखाए जाएँ","अतः जो कोई कणभर भी नेकी करेगा, वह उसे देख लेगा","और जो कोई कणभर भी बुराई करेगा, वह भी उसे देख लेगा"],"n":"अज़-ज़लज़लाह"},{"i":100,"v":["साक्षी है जो हाँफते-फुँकार मारते हुए दौड़ते है","फिर ठोकरों से चिनगारियाँ निकालते है","फिर सुबह सवेरे धावा मारते होते है","उसमें उठाया उन्होंने गर्द-गुबार","और इसी हाल में वे दल में जा घुसे","निस्संदेह मनुष्य अपने रब का बड़ा अकृतज्ञ हैं","और निश्चय ही वह स्वयं इसपर गवाह है","और निश्चय ही वह धन के मोह में बड़ा दृढ़ है","तो क्या वह जानता नहीं जब उगवला लिया जाएगा तो क़ब्रों में है","और स्पष्ट अनावृत्त कर दिया जाएगा तो कुछ सीनों में है","निस्संदेह उनका रब उस दिन उनकी पूरी ख़बर रखता होगा"],"n":"अल-अड़ियात"},{"i":101,"v":["वह खड़खड़ानेवाली","क्या है वह खड़खड़ानेवाली","और तुम्हें क्या मालूम कि क्या है वह खड़खड़ानेवाली","जिस दिन लोग बिखरे हुए पतंगों के सदृश हो जाएँगें","और पहाड़ के धुन के हुए रंग-बिरंग के ऊन जैसे हो जाएँगे","फिर जिस किसी के वज़न भारी होंगे","वह मनभाते जीवन में रहेगा","और रहा वह व्यक्ति जिसके वज़न हलके होंगे","उसकी माँ होगी गहरा खड्ड","और तुम्हें क्या मालूम कि वह क्या है","आग है दहकती हुई"],"n":"अल-क़ारियाह"},{"i":102,"v":["तुम्हें एक-दूसरे के मुक़ाबले में बहुतायत के प्रदर्शन और घमंड ने ग़फ़़लत में डाल रखा है","यहाँ तक कि तुम क़ब्रिस्तानों में पहुँच गए","कुछ नहीं, तुम शीघ्र ही जान लोगे","फिर, कुछ नहीं, तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा","कुछ नहीं, अगर तुम विश्वसनीय ज्ञान के रूप में जान लो! (तो तुम धन-दौलत के पुजारी न बनो)","अवश्य ही तुम भड़कती आग से दो-चार होगे","फिर सुनो, उसे अवश्य देखोगे इस दशा में कि वह यथावत विश्वास होगा","फिर निश्चय ही उस दिन तुमसे नेमतों के बारे में पूछा जाएगा"],"n":"अत-तकासुर"},{"i":103,"v":["गवाह है गुज़रता समय","कि वास्तव में मनुष्य घाटे में है","सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और अच्छे कर्म किए और एक-दूसरे को हक़ की ताकीद की, और एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की"],"n":"अल-अस्र"},{"i":104,"v":["तबाही है हर कचो के लगानेवाले, ऐब निकालनेवाले के लिए","जो माल इकट्ठा करता और उसे गिनता रहा","समझता है कि उसके माल ने उसे अमर कर दिया","कदापि नहीं, वह चूर-चूर कर देनेवाली में फेंक दिया जाएगा","और तुम्हें क्या मालूम कि वह चूर-चूर कर देनेवाली क्या है","वह अल्लाह की दहकाई हुई आग है","जो झाँक लेती है दिलों को","वह उनपर ढाँककर बन्द कर दी गई होगी","लम्बे-लम्बे स्तम्भों में"],"n":"अल-हमज़ह"},{"i":105,"v":["क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे रब ने हाथीवालों के साथ कैसा बरताव किया","क्या उसने उनकी चाल को अकारथ नहीं कर दिया","और उनपर नियुक्त होने को झुंड के झुंड पक्षी भेजे","उनपर कंकरीले पत्थर मार रहे थे","अन्ततः उन्हें ऐसा कर दिया, जैसे खाने का भूसा हो"],"n":"अल-फ़िल"},{"i":106,"v":["कितना है क़ुरैश को लगाए और परचाए रखना","लगाए और परचाए रखना उन्हें जाड़े और गर्मी की यात्रा से","अतः उन्हें चाहिए कि इस घर (काबा) के रब की बन्दगी करे","जिसने उन्हें खिलाकर भूख से बचाया और निश्चिन्तता प्रदान करके भय से बचाया"],"n":"क़ुरैश"},{"i":107,"v":["क्या तुमने उसे देखा जो दीन को झुठलाता है","वही तो है जो अनाथ को धक्के देता है","और मुहताज के खिलाने पर नहीं उकसाता","अतः तबाही है उन नमाज़ियों के लिए","जो अपनी नमाज़ से ग़ाफिल (असावधान) हैं","जो दिखावे के लिए कार्य करते हैं","और साधारण बरतने की चीज़ भी किसी को नहीं देते"],"n":"अल-माऊन"},{"i":108,"v":["निश्चय ही हमने तुम्हें कौसर प्रदान किया","अतः तुम अपने रब ही के लिए नमाज़ पढ़ो और (उसी के दिन) क़़ुरबानी करो","निस्संदेह तुम्हारा जो वैरी है वही जड़कटा है"],"n":"अल-कौथर"},{"i":109,"v":["कह दो, \"ऐ इनकार करनेवालो","मैं वैसी बन्दगी नहीं करूँगा जैसी बन्दगी तुम करते हो","और न तुम वैसी बन्दगी करनेवाले हो जैसी बन्दगी में करता हूँ","और न मैं वैसी बन्दगी करनेवाला हूँ जैसी बन्दगी तुमने की है","और न तुम वैसी बन्दगी करनेवाला हुए जैसी बन्दगी मैं करता हूँ","तुम्हारे लिए तूम्हारा धर्म है और मेरे लिए मेरा धर्म"],"n":"अल-काफ़िरून"},{"i":110,"v":["जब अल्लाह की सहायता आ जाए और विजय प्राप्त हो","और तुम लोगों को देखो कि वे अल्लाह के दीन (धर्म) में गिरोह के गिरोह प्रवेश कर रहे है","तो अपने रब की प्रशंसा करो और उससे क्षमा चाहो। निस्संदेह वह बड़ा तौबा क़बूल करनेवाला है"],"n":"अन-नस्र"},{"i":111,"v":["टूट गए अबू लहब के दोनों हाथ और वह स्वयं भी विनष्ट हो गया","न उसका माल उसके काम आया और न वह कुछ जो उसने कमाया","वह शीघ्र ही प्रज्वलित भड़कती आग में पड़ेगा","और उसकी स्त्री भी ईधन लादनेवाली","उसकी गरदन में खजूर के रेसों की बटी हुई रस्सी पड़ी है"],"n":"अल-मासद"},{"i":112,"v":["कहो, \"वह अल्लाह यकता है","अल्लाह निरपेक्ष (और सर्वाधार) है","न वह जनिता है और न जन्य","और न कोई उसका समकक्ष है।"],"n":"अल-इख़लास"},{"i":113,"v":["कहो, \"मैं शरण लेता हूँ, प्रकट करनेवाले रब की","जो कुछ भी उसने पैदा किया उसकी बुराई से","और अँधेरे की बुराई से जबकि वह घुस आए","और गाँठो में फूँक मारने-वालों की बुराई से","और ईर्ष्यालु की बुराई से, जब वह ईर्ष्या करे।"],"n":"अल-फ़ालक़"},{"i":114,"v":["कहो, \"मैं शरण लेता हूँ मनुष्यों के रब की","मनुष्यों के सम्राट की","मनुष्यों के उपास्य की","वसवसा डालनेवाले, खिसक जानेवाले की बुराई से","जो मनुष्यों के सीनों में वसवसा डालता हैं","जो जिन्नों में से भी होता हैं और मनुष्यों में से भी"],"n":"अन-नास"}]